अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बदनाम और चीन को गुमराह करने के लिए पाकिस्तान रच रहा नई साजिश

Pakistan’s Conspiracy: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बदनाम करने और चीन को गुमराह कर अपना मकसद साधने के लिए पाकिस्तान नई साजिश रच रहा है. इस साजिश के तहत वह पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों पर खुद हमले करवा रहा है और उसकी आड़ में जहां एक तरफ चीन को अपना महत्व बताते हुए सुरक्षा के नाम पर और ज्यादा फंड चाहता है, वहीं ये भी चाहता है कि चीन उसके साथ मिलकर भारत को बदनाम करे और उसका नाम एफएटीएफ की काली सूची से बाहर निकलवाने में मदद करें. चीन ने अपने नागरिकों पर हुए हमलों को लेकर पाकिस्तान के जवानों को चीन बुलाया था जहां हुई बैठक के बाद चीनी परियोजना का काम देख रहे जनरल बाजवा से सुरक्षा का काम वापस ले लिया गया.

पाकिस्तान में चीन कि नागरिकों और इंजीनियरों पर लगातार हमले हो रहे हैं. इन हमलों में अब तक 9 चीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है जबकि दो चीनी नागरिक घायल हुए हैं. यह हमले जुलाई से शुरू हुए और अगस्त में भी लगातार जारी हैं. 14 जुलाई को दास बांध पर हुए हमले में 9 चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी जबकि 28 जुलाई को कराची में एक चीनी नागरिक की कार पर फायरिंग की गई थी और 20 अगस्त को ग्वादर ईस्ट एक्सप्रेस प्रोजेक्ट के पास हुए हमले में एक चीनी नागरिक घायल हो जबकि दो बच्चों की मौत हो गई. पाकिस्तान इन सभी हमलों का ठीकरा भारत के सिर पर छोड़ना चाहता है और वह लगातार चीन को यह बात समझा भी रहा है.

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीन अपने नागरिकों पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान के शीर्ष जनरलों को चीन बुलाया था और इस बैठक के बाद सीपीईसी परियोजनाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी देख रहे पाकिस्तानी पर्यवेक्षक जनरल असीम बाजवा से सुरक्षा की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है. इस बैठक के दौरान पाकिस्तानी जनरल और आईएसआई चीन को लगातार यही समझाती रही कि इन हमलों के पीछे भारत का हाथ है.

सूत्रों के मुताबिक चीनी अपनी व्यापार समुद्री  सुरक्षा और दुनिया में प्रभाव के लिए एक बेल्ट एक रोड नामक जो महत्वाकांक्षी परियोजना की योजना बनाई है वह चीन को इटली और पूरे यूरोप से जोड़ती है. अपनी ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चीन ने चीन-पाक आर्थिक गलियारा बनाया है. जिसमें कई सड़कें रेलवे लाइन में आर्थिक क्षेत्र और तेल पाइपलाइन हैं. जानकारों के मुताबिक 2015-16 में पाकिस्तान ने परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी संपत्ति और चीनी लोगों की सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थता जाहिर की थी और अपने पास फंड और सुरक्षाबलों की कमी का हवाला दिया था. इसीलिए चीनी सीपीईसी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल बनाने और अलग से फंड भी दिया था. चीन से मिले फंड और हथियारों के बल पर पाकिस्तान में पीओके में विशेष सुरक्षा दल नंबर 34 बलूचिस्तान के लिए विशेष सुरक्षा दल नंबर 44 और ग्वादर बंदरगाह के लिए टास्क फोर्स 18 बनाया गया था.

शीर्ष खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर जो हमले हुए उनके डिजिटल सबूतों पर विश्व की विभिन्न एजेंसियां काम कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक अब तक की आरंभिक जांच के दौरान पता चला है कि यह सभी हमले खुद पाकिस्तान ने ही डिजाइन किए थे और इसके पीछे उसका मकसद एक तीर से कई शिकार करना है. खुफिया सूत्रों के हवाले से पाकिस्तान चाहता है कि वह इन हमलों के बाद चीन को सुरक्षा के नाम पर अतिरिक्त फंड देने के लिए बाध्य करें और इस पैसे से वह पाकिस्तान के पंजाब में अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए एक और नई डिवीजन 54 विशेष सुरक्षा डिवीजन बनाने योजना बना चुका है. 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन हमलों के बाद पाकिस्तान चाहता है कि उसके द्वारा खड़े किए गए नकली सबूतों के आधार पर चीन पूरी तरह से आश्वस्त हो जाए कि इन हमलों के पीछे भारत ही है और इसके बाद वह दुनिया को समझाएं कि पाकिस्तान तो आतंकवाद से लड़ रहा है और इसके बाद भविष्य में होने वाली एफएटीएफ की मीटिंग  के दौरान आतंकवाद की काली सूची से पाकिस्तान का नाम बाहर निकालने में उसकी मदद करें. फिलहाल तो चीन ने पाकिस्तान के समझाने के बाद भारत के खिलाफ राग अलापना शुरू कर दिया है लेकिन देखना यह होगा कि चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत के खिलाफ अपनी साजिश रचने में कहां तक सफल हो पाते हैं और पाकिस्तान अपनी इस साजिश में कहां तक कामयाब हो पाता है.

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