आप जो कोविड वैक्सीन लगवा रहे हैं वो कितनी प्रभावी? अब ये ट्रैकर देगा जानकारी

Covid Vaccine Tracker: आप जो कोविड-19 वैक्सीन लगवा रहे हैं वो कितनी असरकारक है, जल्द ही इस बात का पता ऑनलाइन लगा सकेंगे. केंद्र सरकार ने इसके लिए एक ऑनलाइन ‘कोविड वैक्सीन ट्रैकर’ को लॉन्च करने का एलान किया है. वैक्सीन कितनी असरकारक है और किसी वैक्सीन को लगाने के बाद भी कितनी मृत्यु हुई है इन बातों को लेकर ये ट्रैकर वीकली अपडेट (साप्ताहिक अपडेट) देगा. 

इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में इस वैक्सीन ट्रैकर को जल्द लॉन्च करने का एलान किया है. आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बलराम भार्गव ने बताया, “ये ट्रैकर स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर अगले कुछ दिनों में आ जाएगा. इसमें कोविन (CoWIN), आईसीएमआर के नेशनल कोविड टेस्टिंग डेटाबेस और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की वेबसाइट पर मौजूद कोविड-19 इंडिया पोर्टल से डेटा लिया जाएगा.” 

किस एज ग्रुप के लिए वैक्सीन कितनी असरकारक ये ट्रैकर बताएगा 

किस एज ग्रुप के लिए वैक्सीन कितनी असरकारक है इस बात का पता इस ट्रैकर से लगाया जा सकेगा. साथ ही इसमें कोविड-19 से होने वाली मौतों को तीन अलग अलग हिस्सों में बांटा गया है. जिनमें पहले वो लोग जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई थी, दूसरे वैक्सीन की एक डोज लगवाने वाले और तीसरे वो लोग जिनकी वैक्सीन की दोनों डोज लगाने के बाद भी मृत्यु हुई को अलग अलग कैटेगरी में रखा गया है.

डॉ भार्गव ने बताया, “वैक्सीन ट्रैकर वीकली वैक्सीन कवरेज के बारे में जानकारी देगा. इस पर दिखाया जाएगा कि अगर किसी को वैक्सीन नहीं लगायी गयी है तो उसमें रेड लाइन दिखाई जाती है, अगर पहली खुराक ली गई है तो नीली लाइन दिखती है. इसके साथ ही अगर वैक्सीन की दोनों डोज ले जा चुकी है, तो फिर ग्रीन लाइन दिखती है.

वैक्सीन कवरेज के बारे में भी बताएगा ट्रैकर 

इसके साथ ही ये ट्रैकर वैक्सीन कवरेज को लेकर भी जानकारी देगा. देश में कितने प्रतिशत वयस्क आबादी को अब तक वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लग चुकी है ये सभी जानकारी इस ट्रैकर पर मौजूद रहेगी. 

फिलहाल ये साइट अंडर कंस्ट्रक्शन है और इसे 18 अप्रैल से 15 अगस्त तक के सीमित डेटा के साथ टेस्ट किया गया है. डॉक्टर भार्गव के मुताबिक, “ट्रैकर के डेटा के मुताबिक वैक्सीन की एक डोज कोविड से मृत्यु की सम्भावना को 96.6 फीसदी कम कर देती है. जबकि दोनों डोज लगाने के बाद मृत्यु की सम्भावना 97.5 फीसदी कम हो जाती है.”

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