एक्सपर्ट्स ने कोरोना वैक्सीन के अंतराल को कम करने का दिया सुझाव, ब्रिटेन का दिया हवाला

Covid-19 Vaccination: भारत की दो बड़ी पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स की एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज़ की अंतराल को 12 हफ्ते से कम कर 8 हफ्ते करने के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी है. इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन ने सरकार को इस बारें में चिट्टी लिखी है. उनका तर्क है कि लगातार सामने आ रहे म्युटेशन और संक्रमण को रोकने के लिए ऐसा करना सही होगा.

इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन देश की कम्युनिटी मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट की संस्था है, जिन्होंने सरकार को कोविशील्ड वैक्सीन के टीको के अंतराल को कम करने के लिए लिखा है. उनके मुताबिक जब वैक्सीन ट्रायल शुरू हुआ तब अंतर चार हफ्ते था, जो कारगर लग रहा था, लेकिन उसके बाद ये देखा गया कि समय बढ़ाने पर प्रभावोत्पादकता बढ़ जाती है और साइड इफेक्ट कम होते हैं. इस आधार पर जो एविडेंस आधार थे पर जब ढील दी गई थी। ये टैब था जब वायरस के नए स्ट्रेन नहीं सामने आए थे और ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन नहीं हो रहा था.

एक्सपर्ट ने कहा- कम हो दो वैक्सीन के बीच का अंतराल

इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ संजय राय ने कहा- स्टडीज भी आ रही है, यूके ने पहले खुद बढ़ाया था. सारी वैक्सीन ट्रायल जो एस्ट्रेजनेका की वहीं हुई थी उस पर उन्होंने पब्लिकेशन भी दिया था जो उनके ट्रायल का आया था. जिसमें क्या 4 हफ्ते का था और एफीकेसी 62 फ़ीसदी थी फिर उन्होंने पाया कि अगर हम गैप बढ़ाते हैं तो एफीकेसी बढ़ जाती है और साइड इफेक्ट कम होते हैं. इस आधार पर जो एविडेंस आधार थे पर डिले अब होता है तो आप प्रोटेक्टेड नहीं रहते.

इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन देश की कम्युनिटी मेडिसिन की डॉ सुनीला गर्ग ने कहा- अगर आप शुरू के ट्रायल्स को देखें जो इंग्लैंड में हुए थे तो हमने वह ट्रायल 4 हफ्ते के देखे थे और भारत में भी वही रखा पर जैसे-जैसे ट्रायल के रिजल्ट आते रहे. जिन लोगों को 12 हफ्ते के बाद में दूसरी डोज लगी थी उसमें नतीजे अच्छे देखने को मिल रहे थे. इससे दो मक़सद हल हो रहे थे- एक तो इम्यूनो कन्वर्शन ज्यादा, दूसरा हम ज्यादा पॉपुलेशन को वैक्सीनेट कर पाएंगे. इसलिए तो दो डोज के बीच में गैप को बढ़ाया गया. पर जिस टाइम हमने यह शुरू किया था वैक्सीनेशन तब हमारे पास वेरिएंट्स  नहीं थे जैसे अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा. और जो हमारा वैक्सीनेशन बना था वह वुहान ट्रेन से बना था तो आज की तारीख हम देखे हैं तो हमारे 80 फ़ीसदी केस डेल्टा वेरिएंट के आ रहे हैं और जब डेल्टा वेरिएंट हमारे इस में आ चुका है.

यूके ने भी कम किया गैप

लेकिन अब वायरस में म्युटेशन सामने आ रहे है. वहीं शुरुआत में एविडेंस के आधार पर ये अंतर बढ़ाया गया था. लेकिन अब एविडेंस है और स्थिति के हिसाब से कम करने की जरूरत है. खुद यूके जिसने पहले बढ़ाया था गैप, उसने उसे कम कर दिया है.

इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजय राय ने कहा- जो नए वायरस आ रहे हैं उसके बाद उन्होंने वापस उसको गैप को कम कर दिया है क्योंकि उससे प्रोटेक्शन लेवल कम हो जा रहा था. जब तक दोनों डोज नहीं मिल जा रही है और उसके डोज के बाद ही अच्छा प्रोटेक्शन मिलता है. यह माना जाता है इसलिए कम किया गया था तो जो ग्लोबल एविडेंस अभी लग रहा है कि शायद 12 से ज्यादा गैप हो जा रहा है तो आदमी पूरी तरह पर ठीक नहीं हो पा रहा है इसलिए हमने उसको कम करने की बात कही है.

इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन ने सरकार को ये भी लिखा है कि जिनको संक्रमण हो चुका है उन्हें वैक्सीन देने की जरूरत नहीं है. साथ ही, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में टीकाकरण को बढ़ाने की जरूरत है. इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन साइंटिफिक आधार पर कहा की पहले के एविडेंस के आधार पर गैप बढ़ाया था. लेकिन अब जो साक्ष्य है उसके आधार पर गैप करने के बारे सोचे सरकार, जिसे प्रोटेक्शन रहे साथ ही ब्रेक थ्रू यानी टिका लगने के बाद संक्रमण का खतरा भी कम हो. इन दोनों एसोसिएशन को उम्मीद है कि सरकार की नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्युनाइजेशन इस बारें में विचार करेगी और इस दिशा में काम करेगी. 

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