एशियाई बिसात की नई रणनीतिक मोर्चाबंदी तय करेगा पीएम मोदी का अमेरिका दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस महीने के अंत में होने वाला अमेरिका दौरा एशियाई बिसात की नई रणनीतिक मोर्चेबंदी के कई पैमाने तय करेगा. बाइडेन के अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पीएम मोदी की ये उनके साथ पहली आमने सामने की मुलाकात होगी. वहीं पहली बार क्वाड की शिखर बैठक में भारत-अमेरिका-जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख मिलेंगे.

इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर भी पीएम मोदी जहां दक्षिण एशिया में गहराए अफगानिस्तान संकट पर चर्चा करते नजर आएंगे, वहीं कोरोना महामारी की व्यापक चुनौती को लेकर भी उनका विश्व के नेताओं के साथ गहन विचार विमर्श चलेगा. 

जानकार सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के 22 सितंबर की रात तक वाशिंगटन डीसी पहुंचने का कार्यक्रम है. यहां 23 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री सूगा और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातें होंगी. कोविड संकट के दौरान हो रही पीएम मोदी की ये पहली अमेरिका यात्रा है.

महामारी से जुड़ी पाबंदियों और सीमाओं के चलते पहले की तरह उनके कार्यक्रमों में अबकी बार कोई बड़ी जनसभा का आयोजन नहीं होगा. हालांकि सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और कारोबार जगत से जुड़े कुछ अहम नुमाइंदों से उनकी मुलाकात जरूर प्रस्तावित हैं. 

व्हाइट हाउस में होगी क्वाड शिखर बैठक

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा का सबसे अहम दिन 24 सितंबर का होगा जब व्हाइट हाउस में पहली बार क्वाड यानी भारत-अमेरिका-जापान और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक चौकड़ी के नेता एक साथ नजर आएंगे. ये पहला मौका है जब क्वाड देशों के नेता रूबरू बैठक के लिए जुटेंगे. इससे पहले अप्रैल 2021 में अमेरिका की मेजबानी में क्वाड नेताओं की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई थी.

जानकारों के अनुसार क्वाड की ये बैठक अफगानिस्तान से वापसी के दौरान अपने दामन पर लग रहे आलोचना के छींटों को साफ कर रणनीतिक छवि सुधारने की अमेरिका की कोशिश भी है. बताया जाता है कि ये बैठक अमेरिका के आग्रह पर ही हो रही है. इसके चले जापान के प्रधानमंत्री योशिदा सूगा अपने यहां नई सरकार के चुनाव प्रचार का काम छोड़ वाशिंगटन पहुंच रहे हैं.

चीन के मंसूबों को चेतावनी

क्वाड नेताओं की इस बैठक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की नई साझा रणनीति पर चर्चा अपेक्षित है. इस रणनीति में जहां चीन के बढ़ते दबदबे के मुकाबले क्षेत्रीय सहयोग का ताना-बाना मजबूत किया जाना है. इसके अलावा वैक्सीन सहयोग से लेकर आपदा प्रबंधन और सैन्य इंटर ऑपरेबिलिटी यानि आसानी व तालमेल के साथ एक-दूसरे के सैनिक उपकरणों के इस्तेमाल की क्षमता विकसित किया जाना है. इसके अलावा क्वाड के परचम तले तकनीकी साझेदारी और क्षमता विस्तार का भी नया खाका तय होगा. 

क्वाड शिखर बैठक से पहले ही भारत-अमेरिका- ऑस्ट्रेलिया और जापान की नौसेनाएं हिंद महासागर में मालाबार सैन्य अभ्यास के लिए एक साथ हैं. इस बड़े सैन्य अभ्यास के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान और सैटेलाइट क्षमताओं समेत आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाना है. क्वाड नौसेनाओं का यह सैन्य अभ्यास अपनी क्षमताओं को आंकने की कवायद के साथ साथ चीन को भी संदेश देने का पैंतरा है. ध्यान रहे कि, हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने हाल के वक्त में अपनी पनडुब्बी निर्माण क्षमताओं में काफी इजाफा किया है. उसकी कोशिश अपने पनडुब्बी बेड़े और खासतौर पर परमाणु सबमरीन की क्षमताओं को बढ़ाने की है. 

राष्ट्रपति बाइडन करेंगे पीएम मोदी की मेजबानी

क्वाड शिखर बैठक के साथ ही 24 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से भी पहली रूबरू मुलाकात होगी. गौरतलब है कि जनवरी 2021 में जो बाइडेन के सत्ता संभालने के बाद ये पहला मौका होगा जब भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति आमने-सामने की मुलाकात में साथ होंगे. कोरोना संकट के चलते प्रधानमंत्री मोदी 2019 के बाद अब अमेरिका जा रहे हैं.

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली इस शिखर वार्ता में जहां दोनों देशों के व्यापाक रिश्तों पर बात होगी, वहीं अफगानिस्तान के हालात और तालिबानी निजाम की आमद से उभरे हालात व पाकिस्तान-चीन गठजोड़ समेत कई मोर्चों पर आपसी सहयोग मजबूत करने पर जोर होगा.

न्यूयॉर्क भी होगा पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा का अहम पड़ाव 

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा का एक अहम पड़ाव न्यूयॉर्क भी होगा जहां पीएम संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित करेंगे. उम्मीद की जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थाई सदस्य बनने के बाद हो रही इस पहली यात्रा के दौरान पीएम मोदी के भाषण में दुनिया के बदलते सुरक्षा हालात और वैश्विक संस्थाओं में जरूरी सुधार जैसे मुद्दे प्रमुखता से नजर आएंगे. साथ ही अफगानिस्तान में अस्थिरता के मौजूदा हालात के मद्देनजर आतंकवाद की व्यापक चुनौती से निपटने की कारगर रणनीति पर भी जोर होगा. 

पीएम मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भी शरीक होंगे. ये बैठक हालांकि वर्चुअल होगी, लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क भारत के लिहाज से ये मंथन भी अहम होगा. भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि यूएन समेत वैश्विक संस्थाओं को बदलते वक्त की चुनौतियों से मुकाबले के लिए तैयार और चुस्त बनाया जाना चाहिए. इस बात की पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री मोदी 25 सितंबर को ही वापस भारत के लिए रवाना हो जाएं. 

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