कानपुर में बनेगा प्रदेश का पहला बायो डायवर्सिटी पार्क, NGT से मिली हरी झंडी

Kanpur Bio Diversity Park: कानपुर (Kanpur) के गंगा बैराज में प्रदेश के पहले जैव विविधता पार्क (Bio Diversity Park) का रास्ता साफ हो गया है. गंगा बैराज (Ganga Barrage) पर सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के आगे गंगा बेसिन (Ganga Basin) में बनाए जाने वाले बायो डायवर्सिटी पार्क को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  यानी एनजीटी (National Green Tribunal) ने अपनी हरी झंडी दे दी है. एनजीटी की तरफ से गंगा संरक्षण पर काम करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के विशेषज्ञों की टीम ने पार्क का निरीक्षण करके हरी झंडी दी है. टीम ने इस स्थान को पार्क के लिए सबसे उपयुक्त बताया है.

खर्च होगा 50 करोड़ का बजट
एनजीटी की तरफ से गंगा संरक्षण पर काम करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने महानगर में 2 दिनों तक पार्क स्थल का निरीक्षण किया. टीम ने गंगा बेसिन को पार्क के लिए सबसे उपयुक्त जगह बताया है. टीम का नेतृत्व कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ फैयाज खुदसर के अनुसार अगले 15 दिनों में उनकी टीम अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट देगी. जिसके आधार पर केडीए बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी. केडीए के इसी स्थान पर पूर्व में बनाए जाने वाले बॉटनिकल गार्डेन की जगह बनने वाले जैव विविधता पार्क के निर्माण पर कुल 50 करोड़ का बजट खर्च होगा.

तीन चरणों में होगा पार्क का निर्माण
पार्क का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा. गंगा संरक्षण, स्वच्छता और अविरल गंगा के लिए जन जागरूकता में जैव विविधता पार्क का बड़ा योगदान होगा. इस पार्क के निर्माण के लिए केडीए दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से मदद ले रहा है. विश्वविद्यालय के पास जैव विविधता पार्क संरक्षण का एक विशेष विभाग है जो हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार एनजीटी की गाइडलाइन पर काम करता है. ये विभाग देश की कई नदियों के संरक्षण को लेकर काम कर रहा है. निरीक्षण में मंडलायुक्त डॉ राजशेखर के अलावा केडीए, वन विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारी शामिल रहे. प्लानिंग पर जाएं तो जैव विविधता पार्क का तीन चरणों में निर्माण किया जाना है.

पहला चरण- क्षेत्र में स्थित तालाब और गंगा प्रवेश बिंदु की डी-सिल्टिंग (गाद हटाना) कार्य.
दूसरा चरण- स्थानीय गंगा बेसिन पारिस्थितिक तंत्र के अनुसार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण करना.
तीसरा चरण- शौचालय, पार्किंग क्षेत्र, गंगा गैलरी, गंगा पथ (गैलरी), गंगा प्रदर्शनी केंद्र का निर्माण करना.

एनजीटी ने जताई थी आपत्ति
साल 2017 में इस प्रोजेक्ट पर काम उस वक्त रुक गया था जब एनजीटी ने आपत्ति जता दी थी. लेकिन, अब एक बार फिर से इसके बनने की उम्मीद जगी है.

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