कैसे सरकारी ई-करेंसी CBDC क्रिप्टोकरेंसी से है अलग, जानें CBDC की जरूरी जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही अपनी ई-करेंसी CBDC ला सकती है. रिजर्व बैंक इसके लॉन्चिंग की तैयारी का काम कर रहा है. हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया था कि ई-करेंसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी का ट्रायल दिसंबर तक शुरू किया जा सकता है. कागज नोट की करेंसी को घटाने और पैसों के लेन-देन को और सुविधाजनक बनाने के लिए रिजर्व बैंक अपनी ई-करेंसी लाना चाहती है. रिजर्व बैंक के अनुसार पेमेंट सिस्टम को ज्यादा किफायती और रियल लाइम वानने के लिए सीबीडीसी लाया जा सकता है.

CBDC क्या है

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC एक तरह की वर्चुअल करेंसी होगी. इसे सेंट्रल बैंक जैसे रिजर्व बैंक जारी करेंगे. यह एक तरह से कागस की करेंसी नोट का डिजिटल वर्जन रहेगी. सीबीडीसी का आइडिया और कॉनसेप्ट अमेरिकी अर्थशास्त्री और नोबल पुरस्कार विजता जेम्स टैसीन ने दी थी. उन्होंने 80 के दशक में ही पेमेंट के डिजिटल फॉर्म की चर्ची की थी.

कैसे है क्रिप्टोकरेंसी से अलग

क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल करेंसी इनक्रिप्टेड रहती है. यह डीसेंट्रलाइज्ड होती है जो सरकार के नियंत्रण में नहीं होती है. इसके विपरित सीबीडीसी सरकार या उसकी एंजेसी द्वारा जारी कागज वाली करेंसी का एक वर्चुअल फॉर्म है. सीबीडीसी की सप्लाई सेंट्रल बेंक के नियंत्रण में होगी. इस लीगल टेंडल वाली ई-करेंसी बैंक अकाउंट में रखा जाएगा. वहीं क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल वॉलेट में रखी जाती है.   

रिजर्व बैंक के अनुसार देश में करेंसी और जीडीपी का अनुपात ज्यादा है, जिसे देखते हुए सीबीडीसी को अपनाना सही होगा. बड़े ट्रांजैक्शन में नोट के जगह सीबीडीसी के प्रयोग से करेंसी की प्रिटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरिंग और उसे बांटने की कॉस्ट कम जाएगी.

सीबीडीसी बैंक डिपॉजिट के लेनदेन में कमी सीबीडीसी के कारण सकती है. इससे नकद राशि पर लोगों की निर्भरता घट सकती है.

रिजर्व बैंक को प्राइवेट वर्चुअल करेंसी पंसद नहीं है इस कारण ही उसने 2018 में बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को क्रिप्टोकरेंसी में डील करने वालों को किसी भी तरह की सर्विस देने से रोक दिया था. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस सर्कुलर को खारिज कर दिया है.

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