कोरोना काल में दिल की बीमारी के बढ़ते खतरे को कैसे करें कम, जानिए

Heart Care: कार्डियोवैस्कुलर डिजीजेज यानी सीवीडी भारत में मौत का प्रमुख कारण है. कार्डियोवैस्क्युलर या सर्कुलरी सिस्टम हृदय, धमनियों, शिराओं और रक्त नलिकाओं से बना होता है. इनसे जुड़ी कोई भी समस्या सीवीडी कहलाती है. इस तरह सीवीडी, हृदय और रक्त नलिकाओं से जुड़े कई रोगों का समूह है. शुरू में कोरोना महामारी लंग्स को प्रभावित करने के लिए समझा जाता थी, लेकिन उसने दिल को भी संभावित नुकसान पहुंचाया है.

कोरोना काल में दिल की बीमारी से बचाव के उपाय

सबूत बताते हैं कि कोविड-19 ने कार्डियोवैस्क्युलर बीमारी के मरीजों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है. इस दौरान, जांच और इलाज के लिए अस्पतालों में आनेवाले दिल के मरीजों की संख्या को बढ़ते हुए देखा गया है. महामारी ने संक्रमित मरीजों के दिल और लंग की सेहत को बुरी तरह प्रभावित भी किया है. कई मरीजों को दिल की समस्याएं जैसे कार्डियोमायोपैथी विकसित हुई हैं. दिल और लंग्स के मरीजों को कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है.

ऐसे में जो लोग पहले से हार्ट की समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. आपके लिए कुछ आसान तरीके बताए जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप अपने दिल को स्वस्थ रख सकते हैं.

45 मिनट रोजाना व्यायाम करें- घर से काम करते हुए सामान्य से ज्यादा बैठना पड़ रहा है. ये तनाव में और इजाफे का कारण बन भी बन रहा है. रिसर्च में साबित हुआ है कि व्यायाम करने के बावजूद देर तक बैठने का संबंध बदतर स्वास्थ्य नतीजों दैसे दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज और कैंसर से जुड़ता है. इसलिए दिल को स्वस्थ रखने के लिए के लिए 45 मिनट का रोजाना व्यायाम अहम है. 

बॉडी मास इंडेक्स को ठीक रखें- थोड़ा अधिक वजन होना भी मोटापा का प्रमुख जोखिम फैक्टर है. मोटापा एक मेडिकल स्थिति है जो आपकी दूसरी बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दिल का रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और खास कैंसर का खतरा बढ़ाता है. इसलिए अपने वजन को रोजाना नापें और कोशिश करें कि आप अपने आदर्श वजन के करीब रहें. आप बॉडी मास इंडेक्स को 18.5-24.9 को बनाए रखें. 

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रोजाना की स्वस्थ आदत अपनाएं- ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड्स की मॉनिटरिंग करें. दिन में दो बार दातों की सफाई करें. व्यस्त रखनेवाली गतिविधियों को लक्ष्य बनाएं. डाइट पर नियंत्रण पहले से ज्यादा सख्त होना चाहिए क्योंकि शारीरिक गतिविधि का लेवल कम है. शांत और सकारात्मक रहना बहुत महत्वपूर्ण है, नकारात्मक विचारों को हावी न होने दें.  

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