कोरोना पर IIT कानपुर की नई स्टडी, नया Mutant आया तो अक्टूबर में आएगी तीसरी लहर

Coronavirus Third Wave: कोरोना (Coronavirus) महामारी की भयावहता को लेकर कई आकलन पेश किए जा चुके हैं. लेकिन, लगातार कोरोना के खतरे को देखते हुए आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) इस पर रिसर्च कर रहा है. कानपुर आईआईटी के प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल (Manindra Agrawal) ने एक नया आकलन पेश किया है. इस आकलन पर जाएं तो पता चलता है कि अक्टूबर के अंत में या फिर नवंबर की शुरुआत में महामारी की तीसरी लहर (Coronavirus Third Wave) दस्तक दे सकती है. 

कोविड की तीसरी लहर आ सकती है
प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने ऐसी संभावना अपने गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर जताई है. प्रोफेसर अग्रवाल की मानें तो डेल्टा वेरिएंट से मजबूत या कोई नया म्यूटेंट सामने आता है तो कोविड की तीसरी लहर आ सकती है. अगर ऐसा होता है तो इस लहर के चलते देश में एक लाख कोरोना संक्रमित रोजाना सामने आएंगे. दूसरे पहलू को देखें तो इस स्टडी में ये भी कहा गया है कि अगर नया म्यूटेंट नहीं आता है या कमजोर रहता है तो रोजाना अधिकतम 40 हजार लोग ही कोरोना संक्रमित होंगे. 

लोग एंटीबॉडी खोते जा रहे हैं
कोरोना की दूसरी लहर काफी डरावनी थी. इसे कम हुए अभी कुछ ही दिन गुजरे हैं. प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने जो नई स्टडी पेश की है उसमें तीसरी लहर की संभावना जताई गई है. सरकार की ओर से जारी किए जा रहे संक्रमितों के आंकड़ों और सीरो सर्वे के अध्ययन के बाद प्रोफेसर अग्रवाल ने अपने गणितीय मॉडल सूत्र पर ये रिपोर्ट तैयार करने का दावा किया है. प्रोफेसर का कहना है कि तीसरी लहर अगर आती है तो टीकाकरण ना करवाने वाले 37 फीसदी लोगों पर कोरोना संक्रमण का अत्यधिक खतरा होगा. रिपोर्ट को देखने पर ये बात कही जा रही है कि हर महीने लोग एंटीबॉडी खोते जा रहे हैं. रिपोर्ट के हवाले से ये भी कहा जा रहा है कि अब तक कुल 9 फीसदी लोग एंटीबॉडी खो चुके हैं. 

इन लोगों पर खतरा होगा कम 
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जो लोग एंटीबॉडी खो चुके हैं उन्हें तीसरी लहर से पहले बेहद सावधानी बरतनी होगी. हालांकि, वैक्सीन ना लगवाने वालों की तुलना में वैक्सीन लगवाने वालों पर खतरा कम बताया गया है. अनुमान लगाया गया है कि तीसरी लहर, दूसरी लहर जैसी घातक नहीं होगी. इससे पहले प्रोफेसर अग्रवाल ने अध्ययन के आधार पर अगस्त महीने के अंत में तीसरी लहराने की संभावना जता दी थी. प्रोफेसर अग्रवाल ने दूसरी लहर से कई अनुमान लगाए थे जो लगभग सही साबित हुए थे.

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