क्या शिवसेना में हो सकती है बगावत? बीजेपी नेता नारायण राणे के बयान के बाद सियासी हलचल तेज़

Maharashtra Politics: केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने अपनी जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक सभा में कहा कि शिवसेना के कद्दावर नेता और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे पार्टी से ऊब गए हैं और फाइलों पर दस्तखत करने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं, उन्हें जल्द ही फोन किया जाएगा. राणे के इस बयान के बाद राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. सियासी हलकों में राणे के बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है. 

क्या शिवसेना में नाखुश हैं एकनाथ शिंदे?

दरअसल, ये चर्चा कई दिनों से हो रही है कि जिस तरह से पार्टी में आदित्य ठाकरे और उनके करीबियों का वर्चस्व बढ़ा है उससे कई पुराने नेता नाखुश हैं. शिंदे के पास शहरी विकास मंत्रालय जैसा अहम विभाग है. लेकिन खास तौर पर अगर मुंबई और एमएमआर रीजन की बात करें तो एमएमआरडीए की बैठक में एकनाथ शिंदे से ज्यादा तस्वीरें आदित्य ठाकरे की सामने आती रही हैं. हालांकि, शिंदे ने खुलकर कभी इस पर अपनी नाराजगी नहीं जताई है, लेकिन अंदरखाने से उनके नाराज होने की खबरें उनके करीबियों के जरिए सामने आती रहती हैं.

राणे के बयान को एकनाथ शिंदे ने किया खारिज

शिवसेना से नाराजगी पर नारायण राणे के बयान को एकनाथ शिंदे ने खुद खारिज कर दिया. शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चल रही महा विकास अघाड़ी सरकार में सभी मंत्रियों को अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है. मेरे विभाग में भी सीएम उद्धव ठाकरे का कोई हस्तक्षेप नहीं रहता है. सरकार के पॉलिसी डिसिजन के मामले में सीएम से चर्चा और सहमति से ही फैसले होते हैं और ये हर सरकार में होता है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नारायण राणे महा विकास आघाड़ी में शामिल पार्टियों के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. 

शिवसेना में बगावत का पुराना इतिहास

शिवसेना में बगावत कोई नहीं बात नहीं है. बालासाहब ठाकरे के पार्टी अध्यक्ष रहने के दौरान भी छगन भुजबल जैसे कद्दावर नेता ने शिवसेना से दूरी बना ली थी. छगन भुजबल, बालासाहब ठाकरे के करीबियों में से एक थे, जिन्हें बालासाहब ने मुंबई के मेयर पद से लेकर कई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. इसके बावजूद भुजबल शिवसेना का साथ छोड़कर पहले कांग्रेस में और फिर एनसीपी में शामिल हुए.

भुजबल के बाद नारायण राणे, जिन्हें शिवसेना ने महाराष्ट्र का सीएम बनाया. लेकिन राणे ने भी उद्धव ठाकरे से हुए विवाद के बाद पार्टी छोड़ दी. संजय निरुपम और राज ठाकरे जैसे नेता भी पार्टी छोड़कर पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा चुके हैं.

एकनाथ शिंदे की पार्टी में अच्छी पकड़ मानी जाती है. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद एकनाथ शिंदे ही वो नेता थे, जिन्होंने करीब पांच निर्दलियों को शिवसेना के साथ जोड़ा. ठाणे जिले में भी शिंदे की अच्छी पकड़ मानी जाती है ऐसे में शिंदे को कई विधायकों का समर्थन है और वक्त आने पर वे शिंदे का साथ दे सकते हैं.

शिंदे ही नहीं, कई दूसरे मंत्री भी नाराजः चंद्रकांत पाटिल

नारायण राणे के बयान पर शिंदे के खंडन के बाद भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का दावा है कि केवल शिंदे ही नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे सरकार में कई और मंत्री भी नाराज हैं. हालांकि, पाटिल ने अब तक किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है.

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