गोरखपुर में बाढ़ और बारिश से हाहाकार, 135 गांव प्रभावित लाखों लोगों ने ली बांध पर शरण

Gorakhpur Flood: गोरखपुर में बाढ़ और बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है. बाढ़ ने जहां 135 गांवों और 1.52 लाख लोगों की प्रभावित किया है. वहीं बारिश के कारण राप्‍ती, घाघरा और रोहिन के साथ सहायक नदियां भी अपना रौद्र रूप दिखा रही है. यही वजह है कि नदियों का जल स्‍तर बढ़ने से लोगों की दुश्‍वारियां भी बढ़ गई हैं. राप्‍ती लगातार खतरे के निशान से ऊपर बहने के साथ चढ़ाव पर बनी हुई है. यही वजह है कि प्रभावित गांवों की संख्‍या और आबादी तेजी से बढ़ रही है. गोरखपुर में राप्‍ती, घाघरा के साथ रोहिन भी चढ़ाव पर है. इसके साथ ही गोर्रा और आमी नदी भी अपना रौद्र रूप दिखा रही है.  

गोरखपुर की राप्‍ती नदी में बर्डघाट में खतरा बिंदु 74.98 आरएल मीटर से 0.77 आरएल मीटर ऊपर यानि 75.75 आरएल मीटर पर बह रही है. राप्ती चढ़ाव पर है. रोहिन नदी त्रिमुहानी घाट में खतरा बिंदु 82.44 आरएल मीटर 0.54 आरएल मीटर नीचे 81.90 आरएल मीटर पर बह रही है. रोहिन चढ़ान पर है. कुआनो मुखलिसपुर में खतरे के निशान 78.65 आरएल मीटर से 1.13 आरएल मीटर नीचे 77.52 आरएल मीटर पर बह रही है.

घाघरा नदी अयोध्या पुल पर खतरा बिंदु 92.73 आरएल मीटर से 0.13 आरएल मीटर ऊपर यानि 92.86 आरएल मीटर पर बह रही है. घाघरा तुर्तीपार में खतरा बिंदु 64.01 आरएल मीटर 0.6 आरएल मीटर ऊपर यानि 64.61 आरएल मीटर पर बह रही है. घाघरा अयोध्‍या पुल पर उतार और तुर्तीपार में चढ़ाव पर है. गोर्रा नदी पिण्डारा में खतरा बिंदु 70.50 से 0.45 आरएल मीटर ऊपर 70.950 आरएल मीटर पर बह रही है. गोर्रा नदी पिण्डरा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और स्थिर है. 

गोरखपुर के उत्‍तरी कोलिया की रहने वाली राजकुमारी देवी बताती हैं कि उनका 30 लोगों का परिवार है. वे मवेशियों को लेकर बांध पर रह रही हैं. उनके पति ठेला चलाकर जीवन-यापन करते हैं. मकान बाढ़ से घिर गया है. राप्‍ती लगातार बढ़ रही है. राशन-पानी उपलब्‍ध नहीं हो पा रहा है. खाने-पीने के लिए कुछ नहीं है.

ग्रामीण राजमन बताते हैं कि वे कोलिया के रहने वाले हैं. गांव बाढ़ में घिर गया है. जब बाढ़ का पानी हटेगा, तब वे वापस लौटेंगे. अभी लंबे समय तक ऐसी ही स्थिति रहने का अनुमान है. वे बांध पर शरण लिए हुए हैं. शकुंतला बताती हैं कि बारिश से काफी परेशान हैं. बाढ़ ने तो पहले से ही मुश्किल बढ़ाई है. खाने-पीने से लेकर मड़ई डूबने से दिक्‍कतें हैं. पति ठेला चलाते हैं. मवेशी भी परेशान हैं.

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