चांदीवाल कमिटी ने तीसरी बार परमबीर सिंह पर लगाया 25 हज़ार रुपए का जुर्माना

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के लगाए आरोपों की जांच कर रही चांदीवाल कमीशन के सामने तीसरी बार अनुपस्थित रहने की वजह से चांदीवाल कमीशन ने फिर से 25 हज़ार रुपए का जुर्माना परमबीर सिंह पर लगाया है.

कमीशन ने यह भी कहा की इसके पहले का 25 हज़ार का जुर्माना अभी तक नहीं भरा उसे मिलाकर कुल 50 हज़ार रुपए का जुर्माना तीन दिनों के भीतर मुख्यमंत्री कोविड रिलीफ़ फंड में जमा करना होगा. इसके अलावा अनिल देशमुख के करीबी संजीव पलांडे की तरफ़ से कमीशन में सामने एक एप्लिकेशन दायर की गई थी की व्यापारी बिमल अग्रवाल को समन किया जाए और कमीशन के सामने बुलाया जाए.

बिमल अग्रवाल को कमीशन के सामने बुलाया गया

बिमल अग्रवाल वहीं है जिनकी शिकायत के आधार पर मुंबई के गोरेगांव पुलिस स्टेशन में परमबीर सिंह, सचिन वाझे समेत अन्य प्राइवेट लोगों के ख़िलाफ़ वसूली का मामला दर्ज हुए था. पलांडे के वकील की अपलिकेशन के आधार पर ही बिमल अग्रवाल को कमीशन के सामने बुलाया गया. कमीशन के सामने बिमल ने एक एफ़िडेविड दायर किया जिसमें उन्होंने 68 ऑडीओ क्लिप का ज़िक्र किया है और इन ऑडीओ का ट्रान्स्क्रिप्ट भी लिखा है. इन ओडीयो क्लिप्स में बिमल अग्रवाल, मनन नायक और सचिन वाझे का संभाषण है जिसने वाझे पैसों से जुड़ी बातें कोडवार्ड में बिमल अग्रवाल के साथ कर रहा है.

आज कमीशन के सामने सचिन वाझे और संजीव पलांडे को पेश किया गया

अनिल देशमुख की वकील अनिता शेखर कैसटेलिनो ने बताया की हमने कमिशन के सामने बिनती की और कहा की परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया जाए और कमीशन के सामने उपस्थित किया जाए. इस पर कोर्ट 30 अगस्त को अगली सुनवाई करेगी.

क्या था मामला?

परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगाया था, आरोप में कहा था की देशमुख ने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे के माध्यम से मुंबई के 1750 बार और रेस्टोरेंट से 100 करोड़ की वसूली का लक्ष दिया था. सिंह ने यह शिकायत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को 20 मार्च को पत्र लिखकर की थी.

सिंह के इस आरोप के बाद राज्य सरकार ने एक सदस्यि कमिटी का गठन किया जिसने बोम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल को जांच करने के लिए कहा गया. इस कमिटी को चांदीवाल कमिटी के नाम से जाना जाता है, जिसे 30 मार्च को स्थापित किया गया.

दूसरी बार भी कमिटी के सामने अनुपस्थित रहे सिंह

इसी सुनवाई के दौरान सिंह को 18 अगस्त को दूसरी बार समन कर कमिटी के सामने उपस्थित रहने को कहा गया था पर पहली बार की तरह इस बार भी सिंह कमिटी के सामने अनुपस्थित रहे. सिंह का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील संजय जैन और अनुकूल सेठ कमिटी के सामने मौजूद थे, उन्होंने सिंह के ना आने की वजह बताते हुए कमिटी के सामने कहा की सिंह ने हाईकोर्ट में कमिटी को लेकर और उन्हें दिए गए समन को लेकर याचिका दायर की है और इसकी सुनवाई 23 अगस्त को होने के संभावना है इसी वजह से वो कमिटी के सामने नहीं आए.

इसपर चांदीवाल कमिटी ने कहा की, “यह स्पष्ट है कि जांच एक निर्धारित समय के भीतर पूरी की जानी है. हालांकि 30 जुलाई के आदेश पर देर से सवाल उठाया गया है, इसके लिए जांच को सामान्य तौर पर नहीं रोका जाना चाहिए था. अन्य पहलुओं की अनदेखी करते हुए, तथ्य यह है कि पार्टियों को समय सारिणी का पालन करना होगा.”

पहले भी लगाया जा चुका है जुर्माना

इसके बाद न्यायधिश चांदीवाल ने सिंह पर कमिटी के सामने अनुपस्थित रहने के लिए 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया और 3 दिनो के भीतर इस जुर्माने के पैसों को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के कोविड-19 निधि में जमा करने को कहा गया है. इसके अलावा इस मामले में अगली सुनवाई और सिंह को उपस्थित रहने के लिए आख़िरी मौक़ा 25 अगस्त को दिया गया है. आपको बता दें की इसके पहले भी सिंह को चांदीवाल कमिटी ने समन कर कमिटी के सामने उपस्थित रहने के लिए जून के महीने में कहा था उस समय भी सिंह कमिटी के सामने नहीं आए थे तब कमिटी ने उन पर 5 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया था.

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