जन्माष्टमी के व्रत के दौरान सूर्यास्त के बाद नहीं पीना चाहिए पानी, जानें व्रत के नियम

Janmashtami Vrat Niyam 2021: देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में मंदिरों को सजाया जाता है. श्री कृष्ण के जन्म के समय रात्रि 12 बजे तक लोग जागरण करते हैं और भगवान श्री कृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन बाल गोपाल के जन्म दिवस पर लोग उपवास करते हैं. हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के व्रत का भी बड़ा महत्व है. पूरा दिन फलाहार करते हैं. और रात 12 बजे भगवान के जन्म के बाद व्रत पारण करते हैं. इस दिन व्रत रखने वाले के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूरा दिन तो जल ग्रहण करने की छूट होती है, लेकिन सूर्यास्त के बाद भगवान के जन्म के समय तक जल ग्रहण करना वर्जित होता है. आइए जानते हैं जन्माष्टमी के दिन व्रत के कुछ नियम-

जन्माष्टमी व्रत नियम (Janmashtami Vrat Niyam)
जन्माष्टमी के दिन व्रत (janmashtami vrat) की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर, स्नान करके करें. साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. इस दिन आप फलाहार या जलाहार ले सकते हैं. व्रत के दौरान सात्विक रहें और शाम को पूजा करने से पहले एक बार फिर से स्नान कर लें. 

यूं करें कान्हा जी का अभिषेक विधि (Kanha ji Abhishek Vidhi)
भगवान श्री कृष्ण के जन्म बाद के बाद उनकी धातु की प्रतिमा को पात्र में रखें. कान्हा जी की प्रतिमा को पहले दूध, दही, शहद, शर्करा और आखिर में घी से स्नान कराएं. कान्हा जी के इसी  स्नान को पंचामृत स्नान कहते हैं. पंचामृत स्नान के बाद कान्हा जी को जल से स्नान करवाएं. इसके बाद पीताम्बर, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें. कान्हा जी को अर्पित करने वाली सभी चीजें शंख में डालकर ही अर्पित करें. पूजा करने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वे काले या सफेद रंग के वस्त्र न पहने हुए हो. इसके बाद अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जाप करें और प्रसाद ग्रहण करें. 

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