जन्माष्टमी के 4 दिन बाद होता है बछ बारस का व्रत, होती है गाय-बछड़े की पूजा, जानें क्या है कारण

Bach Baras 2021: हर साल जन्माष्टमी के 4 दिन बाद भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछ बारस का पर्व मनाया जाता है. इस साल ये 3 सितंबर को मनाया जाएगा. पंचाग मतभेद के चलते ये पर्व 4 सितंबर को भी मनाया जाएगा. बछ बारस पर्व के दौरान गाय और बछड़े की पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है. कहते हैं कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है और इस दिन गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आर्शीवाद मिलता है. भाद्रपद में पड़ने वाले इस पर्व को गोवत्स द्वादशी या बछ बारस के नाम से जाना जाता है.

बछ बारस की पूजन विधि (bach baras pujan vidhi)
जन्माष्टमी के बाद मनाए जाने वाले इस पर्व का भी अपना ही अलग महत्व है. इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सवेरे स्नान करके साफ वस्त्र पहनती हैं. इसके बाद गाय और उसके बछड़े को स्नान कराया जाता है. दोनों को नए वस्त्र ओढ़ाए जाते हैं. गाय और बछड़े को फूलों की माला पहनाएं, दोनों के माथे पर तिलक लगाएं और सीगों को सजाएं. इसके बाद एक तांबे के पात्र में अक्षत, तिल, जल, सुगंध और फूलों को मिला लें और इसे ‘क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते। सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नम:॥’ मंत्र का उच्चारण करते हुए गौ प्रक्षालन करें. गौ माता के पैरों में लगी मिट्टी से अपने माथे पर तिलक लगाएं. बछ बारस की कथा सुनें और दिनभर व्रत रखें. रात को अपने इष्ट और गौ माता की आरती करके व्रत खोलें और भोजन करें. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गाय के दूध, दही और चावल नहीं खाने चाहिए. बाजरे की ठंडी रोटी खाएं.

बछ बारस शुभ मुहूर्त (bach baras shubh muhurat)
गोवत्स द्वादशी की पूजा 3 सितंबर शुक्रवार को की जाएगी. ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिन पूरा दिन ही पूजन के लिए शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इस दिन अगर माताएं पूरे विधि-विधान से गौ माता और बछड़े की पूजा करती हैं और उन्हें हरा चारा आदि खिलाती हैं, तो उनके घर पर मां की कृपा होती है.

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