जीतन राम मांझी के भोज में शामिल होने से ब्राह्मणों का इनकार, मर जाएंगे लेकिन खाने नहीं जाएंगे

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की ओर से दिए गए विवादित बयान के बाद से ब्राह्मण समाज आक्रोशित है. बयान के बाद कहीं जीतन राम मांझी का पुतला फूंका जा रहा है तो कहीं प्रदर्शन हो रहा है. रविवार को पटना में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से प्रदर्शन किया गया. पार्टी के प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी सह सर्वण क्रांति दल के संरक्षक कृष्णा सिंह उर्फ कल्लू ने कहा कि जीतन राम मांझी द्वारा लगातार ब्राह्मण समाज के लोगों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे सवर्ण समाज के लोगों ने नाराजगी जताई है. जीतन राम मांझी द्वारा ब्राह्मण समाज के लिए भोज का आयोजन किया गया है लेकिन तमाम ब्राह्मण समाज ने यह शपथ ली है कि भोजन ग्रहण करने उनके आवास नहीं जाएंगे. भूखे मर जाएंगे लेकिन मांझी के यहां खाने नहीं जाएंगे.

बता दें कि जीतन राम मांझी ने 27 दिसंबर को ब्राह्मण भोज का आयोजन किया है. इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहा है. वहीं, दूसरी ओर जीतन राम मांझी के आवास पर तैयारी की जा रही है. इसको लेकर यह भी कहा जा रहा है जीतन राम मांझी अपने बयान के बाद भोज के जरिए एक जाति विशेष को एकजुट की कोशिश में जुटे हैं.

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क्या है पूरा मामला?

पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों को लेकर आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था और कहा था कि ये आते हैं और कहते हैं कि बाबू हमको खिलाइए मत नकद दे दीजिए. इस बयान के बाद पूरे सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई और फिर ब्राह्मण समाज ने मांझी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. बाद में मांझी ने कहा कि था उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर नहीं बल्कि अपने ही समाज को लेकर कहा था. उन्होंने राम और सत्यनारायण भगवान की कथा को लेकर भी विवादित बयान दिया था.

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