तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है ISIS-खोरासान, जानिए इस बारे में सबकुछ

ISIS-khorasan: काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को हुए आत्मघाती हमलों का मुख्य संदिग्ध अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (IS) से संबधित आतंकी संगठन है. जिसे इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISIS-K) के नाम से जाना जाता है. हाल के महीनों में ISIS-K से जुड़े हमलों की तीव्रता से कई लोग चिंतित हैं. आइसिस-के की स्थापना छह साल पहले हुई थी. सत्ता और प्रभुत्व की लड़ाई में तालिबान को ये गुट अपना दुश्मन मानता है.

ईरान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान की सीमा पर खोरासान नाम के इलाके में 2012 में लड़ाकों ने एक गुट बनाया था. 2014 में इस गुट का ISIS के प्रति झुकाव हुआ और वो इस्लामिक स्टेट की मुहिम में शामिल हो गए.  ISIS के करीब 20 मॉड्यूल हैं, जिसमें सबसे खतरनाक  ISIS-K यानी खोरासान गुट है. दक्षिण एशिया में खोरासान का नेटवर्क सबसे मजबूत है. ISIS का खोरासान मॉड्यूल इस वक्त सबसे ज्यादा सक्रिय है.

तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है ISIS-खोरासान
खोरासान गुट तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है. तालिबान छोड़कर आए लड़ाकों को कमांडर बनाता है. उज्बेक, ताजिक, वीगर और चेचेन्या से युवाओं की भर्ती करता है. खोरासान गुट अफगानिस्तान में नया ठिकाना बनाने की कोशिश में है. ISIS-K गुट का अल कायदा से गठजोड़ है, इस गुट में अल कायदा से ट्रेनिंग ले चुके लड़ाके भी शामिल हैं.

द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ISIS-K का मानना है कि तालिबान ने अमेरिका के साथ बातचीत करने की इच्छा, उनकी स्पष्ट व्यावहारिकता और पर्याप्त कठोरता के साथ इस्लामी कानून को लागू करने में उनकी विफलता के कारण इस्लामी विश्वास को त्याग दिया है.

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