नागरिकों की कथित जासूसी का ज़िक्र करते हुए दायर की गई जनहित याचिका, HC ने केंद्र से मांगा जवाब

Phone Tapping Issue: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर देश के नागरिकों की कथित तौर पर जासूसी करने के मुद्दे को उठाया गया है. याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब देने को कहा है. 

वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हाल ही में पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी करने की खबर सामने आई थी हालांकि यह याचिका किसी एक मामले को लेकर नहीं बल्कि देश के नागरिकों की कथित तौर पर जासूसी करने के मामलों को ध्यान रखते हुए दायर की गई है. सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने जासूसी में इस्तेमाल होने वाले तीन अलग-अलग सॉफ्टवेयर के बारे में हाई कोर्ट को जानकारी दी. प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा कि अगर किसी भी नागरिक की जासूसी करवाई जाती है, बिना नियमों का पालन किए हुए, तो वह गैरकानूनी है.

प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि देश में अगर किसी की जासूसी होती है तो वह नियम कानून कानून का पालन करते हुए ही हो सकती है. प्रशांत भूषण ने कहा की कानून के हिसाब से होम सेक्रेट्री को फोन टैपिंग या कथित जासूसी से जुड़े मामलों में अनुमति देने का अधिकार है. एक जानकारी के मुताबिक 1 महीने में करीब 7500-9000 लोगों की जासूसी करवाई जाती है तो क्या 7500-9000 लोगों की जासूसी की अनुमति देते हैं गृह सचिव?

केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि वह इस मामले पर कोर्ट में जवाब देने को तैयार हैं. जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कहा कि वह कोर्ट के सामने पूरी जानकारी दें कि कैसे लोगों की जासूसी होती है, उसकी क्या प्रक्रिया है, कौन अनुमति देता है?

इस बीच प्रशांत भूषण ने कहा कि मेरी मांग सिर्फ फोन टैपिंग तक ही सीमित नहीं, बल्कि सरकार इंटरनेट पर पड़ी जानकारियों की भी जासूसी करती है. कोर्ट ने कहा कि अभी हम इस पर कुछ नहीं कह रहे. पहले केंद्र सरकार का जवाब आने दीजिए तब हम देखेंगे. मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.

 

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