पौष माह में सूर्यदेव की पूजा का है विशेष महत्व, सिर्फ ये कार्य करने से ही प्रसन्न होंगे भगवान

Sunday Surya Mantra: रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है. पौष माह में सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा अराधना का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस माह में किया गया पूजा-पाठ विशेष रूप से फलदायी होता है. खरमास के दिन चलने के कारण इस माह में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की मनाही होती है. ऐसे में पौष माह सूर्यदेव की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए. 

भगवान सूर्य देव एक ऐसे देवता हैं जो नियमित रूप से साक्षात दर्शन देते है. ज्योतिषियों की मानें तो करियर और कारोबार में उन्नति और प्रगति के लिए सूर्य का मजबूत होना जरूरी है. सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन पूजा-पाठ करने और मंत्र जाप से वे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. अगर आप भी सूर्य देव की कृपा पाना चाहते हैं तो रविवार के दिन सूर्यदेव के मंत्रों का जाप अवश्य करें. 

1.  ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते,

अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

2. सूर्य कवच

श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्।।

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्।।

शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:।।

ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:।।

सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।।

सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति।।

3. सूर्याष्टकम

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते

सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।

प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

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4. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

5. सूर्य प्रार्थना मंत्र

ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक:।

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