बाल मजदूरी करने वाले बच्चों की लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं सिपाही रिंकी सिंह

Constable Rinky Singh in Firozabad: अपने बच्चों का ख्याल तो सभी मां रखती हैं, लेकिन जो बच्चे घुटन ओर बाल मजदूरी की जिंदगी जी रहे हैं, उनकी जिंदगी बदलने की जिम्मेदारी कौन उठाये? लेकिन उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद (Firozabad) की एक महिला सिपाही (Woman Constable) और उनकी टीम इस जिम्मेदारी को उठाने की शुरुआत कर चुके है. अब तक उन्होंने 300 ऐसे बच्चे जो बाल मजदूरी करने को मजबूर थे, उन्हें बाल मजदूरी, बाल भिक्षुओं के कार्य से मुक्त कराया.

2020 से चला रही हैं अभियान

उतर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद के एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट में काम करने वाली 30 वर्षीय महिला सिपाही रिंकी सिंह अपने पूरे दायित्व से ड्यूटी को अंजाम देती हैं, और उसके साथ-साथ एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी उन्होंने ले रखी है, कि वह बाल मजदूरी को बिल्कुल खत्म करके ही मानेगी. दरसअल, महिला सिपाही रिंकी सिंह ने यह शुरुआत की है कि, जो बच्चे होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई की दुकान, कचरा बीनते हैं, बाल मजदूरी करते हैं और बाल भिक्षु बनकर जो भीख मांगते हैं, वह उन बच्चों को ऐसे कामों से निकालकर उनकी जिंदगी बदलती हैं और महिला सिपाही रिंकी सिंह ने इस पहल की शुरुआत अपनी टीम के साथ 2020 में की थी. उस समय उन्होंने 153 बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को उस घुटन भरी जिंदगी से निकाला था और बाल मजदूरी से निजात दिला कर उनकी जिंदगी बदल दी थी. इसी तरह उन्होंने 2020 में ही 90 ऐसे बाल भिक्षुओं को भी मुक्त कराया, जो गली मोहल्लों और मंदिरों के बाहर भीख मांगते थे. उनका यह सिलसिला थमा नहीं है. 2021 में भी महिला सिपाही रिंकी सिंह ने 57 बाल श्रमिकों को घुटन भरी जिंदगी से मुक्त कराया. सिपाही रिंकी सिंह के साथ इस कार्य में उनकी पूरी टीम काम करती है. महिला सिपाही रिंकी सिंह के पति पदम सिंह भी फ़िरोज़ाबाद एसएसपी ऑफिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं.

बच्चों का भविष्य संवार रही हैं

रिंकी सिंह का कना है कि, उनकी टीम में उनके साथ इंस्पेक्टर भानु प्रताप सिंह, सिपाही जय नारायण, महिला नीतू तिवारी हैं, जो कि अपनी गाड़ी से निकल जाते हैं और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम को साथ लेकर होटल, रेस्टोरेंट, गैराज हलवाई की दुकान, तमाम ऐसी जगह जहां बाल मजदूरी होती है, वहां बाल मजदूरों को खोजते हैं, और उन्हें लेकर आते हैं. इसके बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करते हैं. आज बाल मजदूरी से हुए मुक्त बच्चों को आज बाल श्रमिकों स्कूलों में अच्छी शिक्षा दी जा रही है, और उनके परिवार को सरकार की तरफ से श्रमिक योजनाओं के तहत भत्ता भी दिया जाता है. जिससे बच्चे अच्छी तरह पढ़ सकें और उनके परिवार की भी मदद हो सके.

एसएसपी ने की तारीफ

फिरोजाबाद के एसएसपी अशोक कुमार शुक्ला ने बताया कि, जो लोग सोचते हैं कि, महिलाएं पुरुषों के बराबर काम नहीं कर सकती तो वह यह भी समझ लें, कि अभी हुए ओलंपिक में सबसे ज्यादा महिलाओं ने ही पदक जीत कर दिए हैं, तो पुलिस विभाग में भी महिलाएं को पुरुषों से कभी भी कम ना समझे कि वह पुरषों के बराबर कार्य नहीं कर सकती. वहीं, महिला सिपाही रिंकी सिंह की टीम के इस कार्य से उन्हें 21 अगस्त को लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन शक्ति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा एक प्रशस्ति पत्र, एक मोबाइल फ़ोन देकर उन्हें सम्मानित किया गया.

ये भी पढ़ें.

Locked Toilet: बस अड्डे पर महिला शौचालय पर लगा ताला, अधिकारियों ने दी ये दलील

Source link ABP Hindi