बेशकीमती जिंदगी को बचाने के लिए इस तरह आप उठा सकते हैं कदम

World Suicide Prevention Day 2021: किसी शख्स के अंदर चल रहे उथल पुथल को समझना आसान नहीं है. उसके अंदर डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान और भी चुनौतीपूर्ण है. मुस्कुराहट के पीछे हमेशा छिपे रहनेवाले दोस्त में अयोग्यता की तेज भावना हो सकती है. कई सारे उदास लोगों में बार-बार आनेवाले खुदकुशी के विचारों से संघर्ष की भी संभावना हो. अगर आपका दोस्त सामाजिक मिलन के लिए ना आने का बहाना ढूंढ रहा है, तो हो सकता है आप समस्या का पता लगाना चाहते हों.

एक उदास शख्स मौत, खुदकुशी या जान देने के तरीकों के बारे में बात कर सकता है. देखभाल और भूख की कमी के कारण उसका वजन कम हो सकता है या डिहाइड्रेटेड दिखाई दे सकता है. डिप्रेशन से पीड़ित अकेले शख्स को खुदकुशी से मरने की 20 गुना ज्यादा संभावना होती है. विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हर साल 10 सितंबर को खुदकुशी और उसकी रोकथाम के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए मनाया जाता है. खुदकुशी की रोकथाम की जा सकती है अगर शुरुआती स्तर पर डिप्रेशन की पहचान कर ली जाए और असहाय शख्स को जरूरी इलाज मुहैया करा दिया जाए. डिप्रेशन मानसिक बीमारी की बहुत ही आम शक्ल है. ये सभी उम्र के लोगों में होती है और मनोवैज्ञानिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और जेनेटिक फैक्टर उसका कारण है. 

डिप्रेशन के कारण और लक्षण को जानें

डिप्रेशन में जेनेटिक्स की एक भूमिका होता है और ये पारिवारिक होने के लिए जाना जाता है. विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी का संबंध डिप्रेशन से जुड़ता है. डायबिटीज, हाइपोथायरायडिज्म, क्रोनिक बीमारियां जैसे पार्किंसन या एचआईवी डिप्रेशन पैदा करने के लिए जाना जाता है. 

उदास या उदास महसूस करना, चिड़चिड़ा होना, सामान्य कामकाज में दिलचस्पी की कमी, बिना कारण थकान महसूस करना, बहुत ज्यादा सोना (हाइपरसोमिया) या बहुत कम सोना (इनसोमनिया), भूख में बढ़ोतरी या कमी, वजन में बदलाव, यौन इच्छा की कमी, निराशा, असहाय और बेकार, खुदकुशी या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार डिप्रेशन के लक्षण हैं.  

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अवसादग्रस्त शख्स की कैसे करें मदद

बातचीत- अवसादग्रस्त लोगों से दूरी बनाना पसंद करते हैं, ऐसे में महत्वपूर्ण है कि बराबर उनके साथ बातचीत की जाए. उनसे सीधे उनके लक्षणों के बारे में बात करने के बजाए, संवेदनशील और गैर-निर्णयात्मक तरीके से बात महत्वपूर्ण है. 

अच्छे श्रोता बनें- अवसादग्रस्त शख्स के साथ अच्छा श्रोता बनना भी महत्वपूर्ण है. उनको धैयपूर्वक सुनना बहुत आश्वस्त हो सकता है. आम मान्यता के विपरीत खुदकुशी के बारे में बात जोखिम को नहीं बढ़ाती है और वास्तव में भावनात्मक स्थिति पर चर्चा करना फायदेमंद हो सकता है.

 

 

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