यूपी में प्राथमिक शिक्षकों का ट्रांसफर होगा आसान, नहीं लगाने होंगे अफसरों-नेताओं के चक्कर

प्राथमिक शिक्षकों को अपने ट्रांसफर के लिए विभागीय अधिकारियों, शासन, मंत्री और नेताओं की चौखट नहीं नापनी पड़ेगी. प्रदेश सरकार ने यूपी के करीब डेढ़ लाख प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले लगभग तीन लाख सहायक शिक्षक और प्रधानाध्यापकों को इससे राहत दिलाने की तैयारी कर ली है. योगी सरकार ने ग्रामीण और शहरी काडर खत्म करने का फैसला लिया है, जिसके बाद प्राथमिक शिक्षकों के शहर से गांव और गांव से शहर ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान हो जाएगी. बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने परिषद शिक्षा में शिक्षकों के शहरी और ग्रामीण काडर को समाप्त करने की जानकारी दी है.

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी इलाकों में ट्रांसफर करने में आसानी होगी. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा शिक्षक ग्रामीण क्षेत्र में हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है. काडर व्यवस्था खत्म होने से शिक्षकों का यह असंतुलन समाप्त हो जाएगा और शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी. जिससे प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा. बेसिक शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के प्रमोशन की भी प्रक्रिया जल्द शुरू करने की बात कही है. इस फैसले से प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है. दरअसल, प्राथमिक शिक्षकों के प्रमोशन का फैसला 5 साल बाद लिया जा रहा है.

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कही ये बात

बेसिक शिक्षा मंत्री ने जल्द प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है. शिक्षकों के प्रमोशन से प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की कमी पूरी हो जाएगी. प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय में 10 हजार से अधिक प्रधानाध्यापक के पद खाली पड़े हैं. बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्राथमिक विद्यालयों के सहायक शिक्षकों की पदोन्नति में कोई विवाद लंबित न होने पर उनके प्रधान अध्यापक पद पर प्रमोशन के निर्देश जारी किए हैं.

बेसिक शिक्षा मंत्री ने नई शिक्षा नीति के तहत अंग्रेजी माध्यम के परिषद के स्कूलों को बंद करने का भी निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के परिषद के स्कूल खोले गए थे लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे बंद कर दिया जाएगा. सभी स्कूलों में मातृभाषा में पढ़ाई होगी और इसका मसौदा तैयार कर लिया गया है. उन्होंने कहा प्रधानाध्यापकों को टेबलेट दिए जाने हैं. इसके लिए एक समिति आईआईटी कानपुर की राय लेगी, फिर टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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