सफलता की कुंजी: शत्रु को पराजित करना है तो इन बातों को जरूर जान लें

Safalta Ki Kunji, Motivational Thoughts in Hindi: सफलता की कुंजी कहती है कि सफलता जब प्राप्त होती है तो व्यक्ति के शत्रुओं की संख्या में भी वृद्धि हो जाती है. शत्रु आपकी सफलता से ईष्र्या रखने लगते हैं, और हानि पहुंचाने के बारे में प्रयास और विचार करने लगते हैं. जो लोग इस बात का ध्यान रखते हैं और सतर्क रहते हैं वे शत्रु की हर चाल को असफल कर देते हैं, लेकिन वहीं जो लोग सफलता मिलने पर इस बात का ध्यान रखना भूल जाते हैं या फिर लापरवाह हो जाते हैं, वे गंभीर नुकसान और हानि उठाते हैं. शत्रु को पराजित करना है तो इन बातों को जीवन में ध्यान रखना चाहिए-

अवगुणों का त्याग करें
गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अवगुणों को जितना जल्दी हो सके त्याग कर देना ही उत्तम है. अवगुणों से घिरा व्यक्ति सफलता से दूर हो जाता है. विद्वानों की मानें तो गलत आदतें शत्रु को सबसे अधिक लाभ प्रदान करती है. शत्रु के लिए गलत आदतें, पराजित करने का सबसे सशक्त शस्त्र बन जाता है. इसीलिए शत्रु सदैव आपकी गलतियों और कमियों को तलाश करता है. जैसे ही उसे अवसर मिलता है, वैसे ही वो अपना काम कर देता है. इसलिए अवगुणों से दूर रहना चाहिए.

क्रोध, अहंकार का त्याग करें
सफल व्यक्ति को क्रोध और अहंकार से दूर रहना चाहिए. क्रोध और अहंकार से करीबी भी शत्रु बन जाते हैं. वहीं दुश्मन भी इन चीजों का लाभ उठाता है. ये दोनों ही आदतें शत्रुओं की संख्या में वृद्धि करती हैं. इसलिए इनसे बचकर रहना चाहिए.

स्वभाव में विनम्रता और भाषा में मधुरता
विद्वानों का कहना है कि जिस व्यक्ति के स्वभाव में विनम्रता है और वाणी में मधुरता होती है, उसके शत्रुओं की संख्या भी कम होती है. दूसरों के साथ प्रेमभाव रखने वाला व्यक्ति सभी का प्रिय होता है. शत्रु ऐसे व्यक्ति से भय खाते हैं. 

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