सारु-मारु की गुफा को जीणोद्धार का इंतजार, जिला प्रशासन की अनदेखी से लुप्त हो रही है शिलालेख

Saru-Maru Caves: सीहोर जिले के ग्राम नकटीतलाई पनगुराडिया में सारू-मारू की गुफा के पास सम्राट अशोक का पांचवा शिलालेख है. यहां रविवार को बौद्ध महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. लगभग 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैली इसी पहाड़ी में सैकड़ों की संख्या में पुरातत्व शैल चित्र एवं बौद्ध स्तूप हैं. जिनका रख-रखाव और संरक्षण का जिम्मा राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग का है. लेकिन पुरातत्व विभाग ने सम्राट अशोक के शिलालेख के चारों ओर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किया है.

इस कारण इस शिलालेख को देखने वाले शरारती तत्व शिलालेख से छेड़ छाड़ करते हैं. जिससे शिलालेख का हिस्सा टूट रहा है. जबकि यह शिलालेख सम्राट अशोक की उज्जैन से विदिशा यात्रा का वर्णन करता हुआ पांचवां शिलालेख है. अन्य कंदराओं में बने शिलालेख धूमिल होकर विलुप्त हो रहे हैं. इनके रखरखाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कोई प्रबंध नही किए हैं. इस शिलालेख का छोटा हिस्सा पहले गिर गया है लेकिन अब यह टूटा हुआ हिस्सा और बढ़ गया है. 

स्तूप हैं स्थित 
शिलालेख पर लगभग 60 फिट व्यास के बौद्ध स्तूफ स्थित हैं. जिनकी संख्या सैकडों में है. यहां पर कुछ वर्ष पहले एक शुंग कालीन छत्र हुआ करता था. जिसे श्रीलंका के कोरम्मक विहार की प्रमुख भिक्षुणी संघमित्रा संघरक्षीता के द्वारा दान किया गया है. इसे अब सांची के संग्रहालय में रखा गया हैं. यह स्मारक तथागत गौतम बुद्ध के शिष्य महामोद्गलायन और सारीपुत्र के समय की हैं. जिसमें एक सम्राट अशोक के समय की छतरी हैं.

कई भिक्खुओं की गुफाएं विश्व स्तरीय हैं. इसी स्थान से लगभग 100 किमी दूरी पर सांची से भोपाल की ओर विश्व स्तरीय मुरेल खुर्द स्तूप, अंधेर स्तूप, सोनारी स्तूप, सतधारा स्तूप, भोजपुर स्तूप, तालपूरा स्तूप एवं कई और बौद्ध स्मारक स्थित हैं. यहां सारिपुत्र के समय के अध्ययन केंद्र हुआ करते थे. यहां कई बौद्ध भिक्षुओं की गुफाएं विश्वस्तरीय हैं. जिनके पुनरुद्धार के उद्देश्य से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आज बौद्ध महोत्सव एवं वंदना का कार्यक्रम रखा जा रहा है.

महोत्सव में रहेंगे मौजूद 
सारू-मारू बौद्ध स्तूप पर महोत्सव आयोजन एवं एक दिवसीय मेले का आयोजन रखा गया है. जिसमें कार्यक्रम के मुख्यवक्ता भिक्खु डॉ. करुणाशील राहुल, मुख्य अतिथि महाबोधी सोसायटी श्रीलंका साँची सेन्टर थेरो के अध्यक्ष पु. भते. बानगल विमलतिस्स नायक, आयुष्मान मोतीलाल आलमचंद, धम्म लिपिकार सत्यजीत चंद्रीकापुरे, पाली रिसर्च इंस्टिट्यूट मुंबई के अरविंद भंडारे, जी. पी . मेहरा के मुख्य अभियन्ता आ.ई. धम्मरत्न सोमकुंवर, बुद्धिष्ठ सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रदेश प्रभारी मुकुल वाद्य के अलावा कई अन्य लोग उपस्थित रहेगें.

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