सफलता की कुंजी: युवाओं को इन दो चीजों को लेकर हमेशा रहना चाहिए गंभीर, उठानी पड़ती हैं परेशानियां

Safalta Ki Kunji: चाणक्य नीति कहती कि युवाओं को आलस और गलत आदतों से दूरी बनाकर रखना चाहिए. स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो, तब तक प्रयासों को जारी रखना चाहिए. हिम्मम नहीं हारनी चाहिए. जो हिम्मत हार जाते हैं, उन्हें जीवन में कभी सफलता प्राप्त नहीं होती है. 

गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अनुशासन व्यक्ति को जीवन के महत्व को बताता है. अनुशासन की भावना ही व्यक्ति को परिश्रम के लिए प्रेरित करती है. सफलता का राज परिश्रम में ही निहित है. इस बात को जो नहीं समझते हैं, उनके भाग्य में सफलता का आनंद नहीं है. 

विद्वानों की मानें तो युवाओं को परिश्रम और अनुशासन पर अधिक ध्यान देना चाहिए. क्योंकि ये अवस्था ऐसी होती है जब भविष्य का निर्माण हो रहा होता है. युवा को शक्ति भी माना गया है. ऊर्जा का सही प्रयोग ही सफलता है. जो इस ऊर्जा को सही दिशा में प्रयोग करते हैं, उनके लिए सफलता कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसे लोग जिस कार्य को भी हाथों में लेते हैं, उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है.

अनुशासन
चाणक्य के अनुसार अनुशासन को अपनाने से सेहत और मन दोनों बेहतर बनते हैं. अनुशासन समय की अहमियत को बताता है. वहीं लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासों का प्रबंधन कैसे किया जाए इस बारे में भी अनुशासन से ही प्रेरणा मिलती है. अनुशासन समय प्रबंधन को भी महत्व प्रदान करता है.

परिश्रम
विद्वानों का कहना है कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है. सफलता जितनी बड़ी होगी, उसके लिए परिश्रम भी उतना ही अधिक करना होगा. परिश्रम से भयभीत नहीं होना चाहिए. परिश्रम के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए. अवसर कभी बता कर नहीं आते हैं. यदि आप पहले से ही तैयार हैं तो सफलता मिलने की संभावना प्रबल हो जाती है.

Source link ABP Hindi


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