जिला पंचायत अध्य्क्ष चुनाव के बाद ब्लॉक प्रमुख पर नजर, तैयारियों में बीजेपी आगे तो सपा है पीछे

kanpur Block Pramukh Chunav: भारतीय जनता पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में वो कर डाला जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. 75 में से 67 अध्यक्ष बनाकर समाजवादी पार्टी को ना सिर्फ बैकफुट पर धकेल दिया बल्कि अब तक समाजवादी पार्टी की चली आ रही रणनीति पर चलते हुए उसको हरा दिया. इस बीच ब्लॉक प्रमुख चुनाव के लिए वक्त बहुत कम है और राजनीतिक पंडितों की मानें तो घोषित कार्यक्रम से भाजपा को फायदा मिल सकता है. चुनावी प्रबंधन में सभी दलों से दो कदम आगे रहने वाली भाजपा ने ब्लॉक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है. पार्टी जल्द ही अपने प्रत्याशी घोषित करना शुरू कर देगी. इन चुनावों से पहले ही भाजपा ने ब्लॉक प्रभारी बनाकर उनको जिम्मेदारियां सौंप रखी हैं. कानपुर-बुन्देलखण्ड के 14 जिलों की 110 सीटें हैं जिनमे पार्टी ने 100 सीटों में जीत का लक्ष्य रखा है.  

पूरी है भाजपा की तैयारी 
भाजपा सूत्रों की मानें तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजों से उत्साहित संगठन ब्लॉक लेवल पर अपनी तैयारियां पूरी कर चुका है. वहीं, सपा हार के बाद ताबड़तोड़ तैयारी में जुटी हुई है. कानपुर नगर के 10 ब्लॉक में से 5 के प्रत्याशी पहले ही घोषित हो चुके हैं जो चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं. बाकी बचे 5 नामों की घोषणा भी जल्द ही कर दी जाएगी. ब्लॉक प्रमुख के लिए 8 जुलाई तक नामांकन है. नाम वापसी के लिए 9 जुलाई के समय दिया गया है और 10 जुलाई को वोटिंग होगी. जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. 

कई दावेदार ताल ठोंक रहे हैं
कानपुर-बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 14 जिले आते हैं. इनमें 13 जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. ये बात अलग है कि पंचायत चुनाव में एसपी का प्रदर्शन जबरदस्त तो भाजपा का अपेक्षा से बुरा प्रदर्शन रहा. आगामी चुनाव में इस क्षेत्र के 14 जिलों में लगभग 6 हजार 500 से अधिक बीडीसी सदस्य 110 से अधिक ब्लॉक प्रमुख का चुनाव करेंगे. हालांकि, भाजपा को एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की तर्ज पर ब्लॉक प्रमुख में भी कई सीटों पर समर्थन देना पड़ेगा. इस बीच कुछ सीटें ऐसी हैं जहां पार्टी में के कई दावेदार ताल ठोंक रहे हैं. ऐसे में एक प्रत्याशी पर सहमति बनती नहीं दिखती. इन चुनावों में भी भाजपा कई सीटों पर बाहर से समर्थन देने को मजबूर हो सकती है और उनकी जीत दर्ज करने के बाद पार्टी के दरवाजे खोल सकती है.

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