कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा- सोनिया गांधी का हर फैसला मंजूर

नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस का विवाद सुलझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से करीब एक घंटे मुलाकात की. जिसके बाद कैप्टन ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष की तरफ से जो भी फैसला किया जाएगा वह उन्हें मंजूर होगा. इस घटनाक्रम से माना जा रहा है कि कई हफ्तों से जारी पंजाब कांग्रेस का झगड़ा जल्द खत्म होगा. हालांकि कैप्टन के खिलाफ बगावत करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को मिलने वाली जिम्मेदारी पर अभी भी सस्पेंस कायम है. 

सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद दस जनपथ के बाहर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार के विकास कार्यों पर बात हुई. राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष जो भी फैसला करेंगी वह मुझे मंजूर होगा.” हालांकि सिद्धू को दी जाने वाली जिम्मेदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर कैप्टन ने कहा कि सिद्धू के बारे में मैं कुछ नहीं जानता. इस बयान से साफ है कि सिद्धू को लेकर कैप्टन की तल्खी कम नहीं हुई है. 

18 बिंदुओं पर काम करने को कहा

सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी ने कैप्टन को एकता का संदेश देते हुए सबको साथ लेते हुए 18 बिंदुओं पर काम पूरा करने को कहा. सूत्रों ने दावा किया कि जल्द मामला सुलझ जाएगा. हालांकि यह कहने में तो आसान है लेकिन विवाद सुलझाने में कांग्रेस आलाकमान के पसीने छूट रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व 2022 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर जल्द ही फैसलों का ऐलान कर देगा.

वहीं सबसे बड़ा सस्पेंस सिद्धू की भूमिका को लेकर है. उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. लेकिन कैप्टन के करीबियों का दावा है प्रदेश अध्यक्ष हिन्दू समाज से होगा. उपमुख्यमंत्री का पद किसी दलित नेता को मिल सकता है. सिद्धू को विधानसभा चुनाव में प्रचार समिति की कमान दी जा सकती है. साथ ही उनके लिए कैप्टन सरकार में शामिल होने का विकल्प भी खुला हुआ है.

बचे हुए कार्यकाल के लिए कैप्टन की कुर्सी तो सुरक्षित लगती है लेकिन इसका इस्तेमाल कैप्टन को 18 मुद्दों पर कार्रवाई में करना है. इनमें प्रमुख हैं गुरुग्रंथ साहिब बेअदबी, पुलिस फायरिंग मामले में कार्रवाई, ड्रग्स और खनन माफिया के ऊपर एक्शन, बिजली संकट का समाधान और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का ऐलान. इन मुद्दों पर कैप्टन का प्रदर्शन ही तय करेगा कि 2022 चुनाव को लेकर उनके हाथ मे कितनी ताकत रहेगी और क्या उन्हें छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में चेहरा बनाया जाएगा?

कुल मिलाकर बात यही कही जा रही है कि जब कांग्रेस पार्टी पंजाब में सरकार और संगठन से जुड़े बदलावों का ऐलान कर देगी तो उसके बाद ही साफ होगा कि एक म्यान में कैप्टन और सिद्धू नाम की दो तलवारें रह पाएंगी या नहीं!

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