माया मोह के चक्कर में फंसे महंत, कानपुर के दो प्रसिद्ध मंदिरों में गहराया वर्चस्व का विवाद

Controversy in Kanpur Temple: कानपुर के दो प्रसिद्ध मंदिरों में साधु संत आमने सामने आ गए हैं. गद्दी और संपत्ति को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि मामला पुलिस कमिश्नर तक जा पहुंचा है. दोनों ही मंदिरों के मामले में चोरी की एक-एक एफआईआर तक दर्ज कर ली गई है. ऐसे में शहर के दो बड़े मंदिरों में चल रहे विवाद की पड़ताल करती हमारी यह रिपोर्ट पढिए.

दानपात्रों से हुई चोरी 

कानपुर का आनंदेश्वर मंदिर छोटा काशी कहा जाता है. कानपुर के परमट में स्थित भगवान शिव का यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. आसपास के जनपदों से सावन और शिवरात्रि में यहां मेला जैसा लगता है. लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र परमट मंदिर इन दिनों विवादों में है. यहां जूना अखाड़ा महंत की गद्दी तय करता है लेकिन श्याम गिरी जी महाराज इच्छा गिरी महाराज के बीच का विवाद और स्वयं को महंत घोषित कर गद्दी पर आसीन होने के चलते जूना अखाड़े के साधु-संतों को इसमें कूदना पड़ा है. विश्व हिंदू परिषद ने बढ़ते विवाद को थामने के लिए साधु सतों के साथ एक बैठक कर इसका हल निकालने की कोशिश की लेकिन मामले ने तूल पकड़ रखा है. बजरंग दल के पूर्व संयोजक और कानपुर के मठ मंदिरों से जुड़े रहने वाले प्रकाश शर्मा की माने तो जूना अखाड़ा ही गद्दी के हकदार को तय करता है लेकिन मंदिर में पिछले दिनों आ धमके कुछ संतों ने माहौल को बिगाड़ दिया है. 14 दानपत्रों में और मंदिर के सोना चांदी के आभूषणों को चोरी किया गया है. 

दो महंतों की लड़ाई पहुंची थाने

वहीं, दूसरा मामला पनकी धाम मंदिर का है. यह वही पनकी धाम मंदिर है जहां बुढ़वा मंगल के मौके पर रेलवे भी श्रद्धालुओं के लिए रेलगाड़ियों का पहिया पनकी धाम रेलवे स्टेशन पर थामने को मजबूर हो जाता है. अति प्रसिद्ध ये मंदिर भी विवादों में घिरा हुआ है. यहां के दो महंत जितेद्र दास और कृष्ण दास की लड़ाई अब थाने तक पहुंच गई है. कुछ दिन पहले एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ जिसमें महंत जीतेंद्र दास गर्भ गृह के दानपात्र से पैसे निकालते देखे गए थे. इसे चोरी का नाम दिया गया. कृष्ण दास के पक्ष के लोगों ने इसे चोरी का नाम देते हुए पुलिस से शिकायत करी, जिसके बाद महंत जितेंद्र दास पर चोरी का मुकदमा लिख दिया गया. पनकी मंदिर के संचालन के लिए बने ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी रामजी त्रिपाठी की माने तो दोनों ही महंत लगातार अपनी कार्यशैली से सवालों के घेरे में हैं. ऐसे में मंदिर के संचालन और श्रद्धालुओं के हित को देखते हुए इसके संचालन के लिए किसी रिसीवर को रख दिया जाना चाहिए. 

मंदिरों में आता है करोड़ों का चढ़ावा 

वहीं, पुलिस ने दोनों ही मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया है. दोनों ही मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र हैं. जहां सालभर में एक से डेढ़ करोड रुपये का चढ़ावा आता है. सोना चांदी का दान अलग से किया जाता है. मंदिर प्रशाशन के पास FD और ज़मीन भी खूब है. ऐसे में महंतों के बीच की लड़ाई को आप समझ सकते हैं. कहा जाता है कि, इस संसार में साधु और संत भौतिक सुख का त्याग करते हैं लेकिन यहां तो सन्त मोह माया के चक्कर में भक्तों की भक्ति से खिलवाड़ करते दिख रहे हैं. 

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