गढ़वाल को प्रतिनिधित्व न मिलने पर उत्तराखंड में शुरू हुुई क्षेत्रवाद की सियासत

Uttarakhand Politics : मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस ने उत्तराखंड के डिमोशन का आरोप बीजेपी पर लगाया है. हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पार्टी नेताओं की अलग अलग राय है. तो वहीं, बीजेपी ने कहा है कि उनकी पार्टी क्षेत्रवाद, जातिवाद पर विश्वास नहीं करती. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री और केंद्र में राज्य मंत्री बने अजय भट्ट दोनों कुमाऊं से हैं, इसके बाद गढ़वाल के प्रतिनिधित्व की मांग उठने लगी है.

क्षेत्रवाद पर छिड़ी सियासत

केंद्र सरकार के कैबिनेट में फेरबदल के बाद उत्तराखंड की राजनीति में सियासी पारा चढ़ गया है. मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री अजय भट्ट दोनों कुमाऊँ से हैं. जबकि शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक गढ़वाल से थे, वहीं, प्रदेश धामी से पहले दोनों ही मुख्यमंत्री गढ़वाल के पौड़ी से थे,जिन्हें हटाए जाने से गढ़वाल के बीजेपी कार्यकर्ता में मायूसी है. हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस की एक राय नहीं है. अध्यक्ष कुछ और पार्टी नेता कुछ और ही कह रहे है. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि, केंद्र में उत्तराखंड की स्थिति को कमजोर करने का काम किया गया है. तो वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह इसे मीडिया की उपज बताया. उनका कहना है कि, उत्तराखंड वैसे ही छोटा राज्य है, इसे गढ़वाल और कुमाऊ में नहीं बाटना चाहिए. 

बीजेपी ने दी सफाई

वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी के नेता व कार्यकर्ता निशंक के हटाए जाने से मायूस जरूर हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि डॉ. निशंक जी उनके बड़े नेता हैं और केंद्रीय नेतृत्व कुछ सोच कर और किसी रणनीति के साथ यह कदम उठाया होगा और आने वाले दिनों में डॉ. निशंक को भी कोई न कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी. हालांकि प्रवक्ता ये भी कहते हैं कि उनकी पार्टी क्षेत्रवाद व जातिवाद पर विश्वास नहीं करती बल्कि काम पर विश्वास करती है.

गढ़वाल और कुमायूं का संतुलन

देवभूमि उत्तराखंड में अगले साल चुनाव होने हैं. ऐसे में तमाम पार्टियां गढ़वाल और कुमाऊं के क्षेत्रीय कॉम्बिनेशन के साथ-साथ जातीय कॉम्बिनेशन को भी साधने की कोशिश करती हैं, लेकिन बीजेपी ने इस बार कुमाऊं मंडल पर ज्यादा भरोसा किया है. जबकि गढ़वाल को केंद्र की मोदी सरकार प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है. लिहाजा देखने वाली बात होगी कि बीजेपी इस असंतुलन को भविष्य में कैसे साधती है.

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