जनसंख्या नियंत्रण कानून के तहत मिलेंगी बम्पर सरकारी सुविधाएं, पढ़ें ये रिपोर्ट

UP Population control Act: उत्तर प्रदेश सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की तैयारी में है. इसको लेकर राज्य विधि आयोग ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है और उस ड्राफ्ट को वेबसाइट पर डाल कर 19 जुलाई तक उस पर नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं. उसके बाद ये ड्राफ्ट सरकार के पास भेज दिया जाएगा. उस ड्राफ्ट को लेकर राज्य विधि आयोग के चेयरमैन ए एन मित्तल से बात की. बता दें कि, एएन मित्तल अलीगढ़ के ही रहने वाले हैं.

जनता के सुझाव मांगे गये

एएन मित्तल ने कहा कि, राज्य सरकार समय-समय पर अपनी नीतियां घोषित करती है, और निश्चित रूप से योगी सरकार जो नीति लेकर आ रही है, वह कारगर होगी. इसके अलावा राज्य विधि आयोग भी इस विषय पर एक कानून बना रहा है, जिसमें हमारी जनसंख्या पर नियंत्रण करने के साथ ही, उसके स्थायीकरण के लिए और कल्याणकारी योजनाएं हैं, उनका लाभ देने के लिए. हमने अपना ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है और जनता से सुझाव 19 जुलाई तक मांगे हैं और उसके बाद जो राज्य सरकार की जनसंख्या नीति होगी उससे कहीं विरोधाभास नहीं होगा बल्कि इजाफा ही होगा.  

कानून मानने वालों को मिलेंगी सरकारी सुविधाएं

मित्तल ने बताया कि, यह अचानक इसको नहीं कह सकते हैं. मैं आपको बता दूं कि, 35 बार लोकसभा में जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए विभिन्न पार्टियों द्वारा बिल प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन वह बिल कभी भी पारित नहीं हुए. सन 1977 में ही जनसंख्या से संबंधित मामला संविधान में संशोधित करके राज्य सरकार को यह शक्ति प्रदान कर दी गई है कि, वह इस पर कानून बना सके, और मैं तो यही कहूंगा कि पहले की सरकारों ने इस विषय पर कानून बनाने की हिम्मत नहीं जुटाई. क्योंकि अगर कानून बन गया होता तो आज हमारी जनसंख्या दिन दूनी रात चौगुनी नहीं बढ़ती. हमने जो ड्राफ्ट तैयार किया है, वह किसी जाति, धर्म या किसी समुदाय विशेष को टारगेट करके नहीं बना रहे हैं बल्कि हमारा कानून सीधा सीधा ही होगा कि जो व्यक्ति जनसंख्या नीति को अपनाया उसको तमाम प्रकार की सुविधाएं मिलेंगी. जैसे वह सरकारी सेवक है तो उसको तीन इंक्रीमेंट मिलेंगे. विकास प्राधिकरण द्वारा जो फ्लैट आवंटित किए जाते हैं उसको वरीयता मिलेगी. उसके बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिलेगी, औरर हम सुविधा देने जा रहे हैं कि जो बीपीएल परिवार वाले हैं, अगर एक बच्चे के बाद अपनी नसबंदी करा लेते हैं तो उनको एक मुश्त एक लाख रुपये प्रदान किया जाएगा. उसके अलावा स्नातक तक की शिक्षा और चिकित्सा का भार सरकार उठाएगी.

नसबंदी के बाद भी बच्चा होता है ते मिलेगा हर्जाना 

उसके अलावा जो टेक्निकल कोर्सेज हैं, एमबीबीएस, बीटेक उसमे भी उन बच्चों को वरीयता दी जाएगी. जितने भी डॉक्टर हैं, जो नसबंदी के कार्यक्रम में लगे हुए हैं, उन डॉक्टरों का एक बीमा राज्य सरकार के खर्चे पर कराया जाएगा और मान लीजिए किसी मामले में नसबंदी फेल होती है और बच्चा हो जाता है तो वह बच्चा दो बच्चों की संख्या में नहीं जोड़ा जाएगा और उस महिला को भी 50 हजार का कंपनसेशन दिया जाएगा, और यह पाया जाता है कि डॉक्टर की लापरवाही से ऐसा हुआ है तो उस डॉक्टर से पैसा रिकवर किया जाएगा. लेकिन, हम जो कानून बनाने जा रहे हैं, वह सभी जातियों धर्मों को लेकर बना रहे हैं. हमने विचार किया है, मुस्लिम समुदाय में एक से ज्यादा पत्नी रखने का रिवाज है तो यदि किसी व्यक्ति की एक से अधिक पत्नी है और उस पुरुष के सभी पत्नियों को मिलाकर दो से ज्यादा बच्चे हैं तो वह इस जनसंख्या नीति में नहीं आएगा और यदि उसकी अलग-अलग पत्नियों के दो से कम बच्चे हैं तो उनको इस नीति का लाभ मिलेगा.

किसी समुदाय पर टारगेट नहीं

किसी समुदाय को टारगेट करके कानून नहीं बनाया जा रहा है, इसमें कोई बाध्यता नहीं है कि आप नसबंदी कराएं इसमें कोई बाध्यता नहीं है कि आप दो बच्चों की नीति अपनाये. लेकिन हम इतना जरूर कर रहे हैं कि जो दो बच्चों की नीति को अपनाएंगे उनको राज्य सरकार की तरफ से सुविधाए प्रदान की जाएंगी और अगर वह विशेष सुविधा नहीं लेना चाहते तो वह स्वतंत्र हैं. 2 बच्चे करें, 5 करें या 10 करें ऐसा कोई रोक नहीं है. इतना जरूर रोक होगी कि उनका राशन कार्ड 4 यूनिट तक हम प्रस्तावित कर रहे हैं. चार यूनिट तक ही सीमित कर दिया जाएगा. प्रश्न यह है कि, टैक्सपेयर के पैसे पर चाहे कोई विशेष जाति हो या समुदाय हो तो उसको वो सुविधा क्यों दी जाए, जो सरकार की बात नहीं मानती है. अगर आपको बात नहीं माननी तो मत मानिए.  देखिए मोदी सरकार 80 करोड़ लोगों को फ्री में वेक्सीन दे रही है, अगर हमारी जनसंख्या 135 करोड़ की जगह 100 करोड़ होती तो इस महामारी से अच्छी तरह निपट सकते थे. अब मोदी सरकार की योजना है कि, हम हम 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त राशन देंगे तो एक सीमा होती है. सरकार कोई अपने पैसे से नहीं देती. सरकार जो कुछ करती है वह टैक्स् पेयर के पैसे से करती है. मैं तो यह कहता हूं कि, सरकार पर बर्डन नहीं है बल्कि टैक्स पेयर पर बोझ है. 

हमारा पानी का स्तर नीचे गिरता जा रहा है. ऑक्सीजन की कमी आपने देखी हुई है, तो हमारे जो प्राकृतिक संसाधन है वह बहुत सीमित हैं. उनकी तरफ भी सबको विचार करना है. देश हमारा है और देश उनका भी है. यह सब का है. मैं एक ही बात कहता हूं कि, अगर आप इसको अपना देश मानते हैं, उसको जला क्यों रहे हैं और अगर आप इसको अपना देश नहीं मानते तो आप यहां रह क्यों रहे हैं. यह बात उन लोगों के लिए कह रहा हूँ, जो इस प्रकार के दंगाई और वामपंथी हैं और देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, और खुलकर कह रहा हूं कि, चाहे वह शाहीन बाग का आंदोलन, किसान आंदोलन हो आप इस देश के संपत्ति को जला क्यों रहे हैं, आप अपने घर को फूंक कर देखिए. अगर आप इस देश को अपना देश नहीं मानते हैं तो यहां रह क्यों रहे हैं, जहां जाना है वहां जाइए. बात कड़वी जरूर लगती है लेकिन देश भक्ति नहीं होगी जब तक आप के अंदर तब तक देश का विकास नहीं हो सकता.

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