कोरोना वायरस का Epsilon स्वरूप एंटीबॉडी को दे सकता है चकमा

कोरोना वायरस पर रिसर्च जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं. अब ये साफ हो गया है कि कोरोना वायरस बदलते रहता है, और एक नया वेरिएन्ट सामने आ जाता है जो शायद कोविड-19 के पहले स्ट्रेन से ज्यादा तेज फैलता है. ज्यादातर लोगों का मानना है कि कोविड-19 की वैक्सीन उनको इन खतरनाक वेरिएन्ट्स से बचाती हैं, लेकिन रिसर्च बताते हैं कि उनमें से कुछ वेरिएन्ट्स वैक्सीन की एंटीबॉडीज से बच सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

म्यूटेशन वैक्सीन को चकमा देने में मददगार

1 जुलाई को पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक नई रिसर्च में पाया गया कि कोरोना वायरस का Epsilon वेरिएन्ट वर्तमान वैक्सीन या पूर्व के संक्रमण से उपलब्ध सुरक्षा से बचने के लिए वायरस की मदद कर सकता है. वाशिंगटन यूनिर्सिटी के विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना वायरस के Epsilon स्वरूप को पहली बार पता पिछले साल कैलिफोर्निया में खोजा गया था, और टीकाकरण के लिए अधिक प्रतिरोधी दिखा था. रिसर्च में दावा किया गया है कि ये स्वरूप लैब में बनी एंटीबॉडीज को चकमा दे सकता है और टीकाकरण करवा चुके लोगों के प्लाज्मा में एंटीबॉडीज के असर को कम कर सकता है. उसके स्पाइक प्रोटीन में तीन बदलावों का पता चल चुका है. शोधकर्ताओं ने खोजा कि वैक्सीन प्राप्त कर चुके लोगों के प्लाज्मा से एंटीबॉडीज का प्रभाव म्यूटेशन घटा देता है. 

Epsilon वेरिएन्ट के बारे में क्या जानते हैं?

Epsilon वेरिएन्ट, CAL.20C के नाम से भी जाना जाता है. पहली बार उसका पता पिछले साल कैलिफोर्निया में चला था. स्पाइक प्रोटीन में उसका सबसे चिंताजनक म्यूटेशन L452R है. कैलिफोर्निया में संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की तरफ से वायरल स्ट्रेन को ‘वेरिएन्ट ऑफ कंनसर्न’ घोषित किया जा चुका है. इस साल 29 जून को इसका स्तर कम कर फॉर्म ऑफ इंटेरेस्ट कर दिया गया. ये फैसला वर्तमान सबूत के संकेत को समझकर किया गया है कि इलाज और टीकाकरण  Epsilon वेरिएन्ट के खिलाफ प्रभावी हैं. माना जाता है कि ये पूर्व के कोरोना वायरस वेरिएन्ट की तुलना में 20 फीसद अधिक संक्रामक है. हालांकि, ये स्वरूप वर्तमान में प्रचलित नहीं माना जाता है. 

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