कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास आउट इन फील्ड्स में बना सकते हैं बेहतरीन करियर, जानें टॉप 5 ऑप्शन

कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास करने वाले स्टूडेंट्स के पास काफी अच्छे करियर विकल्प होते हैं. स्टूडेंट्स अकाउंट्स से लेकर बिजनेस स्टडीज, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ जैसे सब्जेक्ट करियर ऑप्शन के तौर पर सिलेक्ट कर सकते हैं. यहां हम आपको कुछ करियर ऑप्शन बता रहे हैं जो कॉमर्स के स्टूडेंट्स के लिए बेहतर हैं.

BBA-  कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास आउट छात्र बीबीए कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. ये कोर्स तीन साल का ग्रेजुएशन कोर्स होता है. इस कोर्स में बिजनेस से जुड़े विषयों की स्टडी कराई जाती है.बीबीए कोर्स के दौरान कॉर्पोरेट ऑपरेशन से संबंधित चीजें सिखाई जाती है.

बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ (LLB) कॉमर्स पास आउट स्टूडेंट्स बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ कोर्स को सिलेक्ट कर सकते हैं. इस कोर्स को करने के बाद काउंसिल ऑफ इंडिया से डिग्री दी जाती है. बैचलर ऑफ लेजिस्लेटिव लॉ कोर्स को करने के बाद छात्र वकील बन जाते हैं. इसके बाद अगर वे चाहें तो फैमिली लॉयर बन सकते हैं या प्रॉपर्टी लॉयर भी बन सकते हैं या फिर कंपनी लॉयर की भूमिका भी निभा सकते हैं. गौरतलब है कि कॉमर्स स्ट्रीम वाले ही नहीं इस ऑप्शन को आर्ट्स से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स भी चुन सकते हैं.

चार्टर्ड अकाउंटेंट – सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंट एक प्रोफेशनल कोर्स माना जाता है.इसमें कॉमर्स बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स ही जा सकते हैं. इस कोर्स में एडमिशन के लिए काफी कॉम्पिटिशन मिलता है और काफी एग्जाम भी क्लियर करने होते हैं इसके बाद ही एजुकेशन मिलनी शुरू होती है. गौरतलब है कि बैचलर की किसी भी डिग्री के मुकाबले चार्टर्ड अकाउंटेंट काफी मुश्किल है.

कंपनी सेक्रेटरी (CS)- कॉमर्स स्ट्रीम से पास आउट स्टूडेंट्स सीएस या कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स भी कर सकते हैं. ये कोर्स इंस्टिट्यूट कंपनी सेक्रेट्री ऑफ इंडिया या ICSI कराता है. कई कॉमर्स बैकग्राउंड वाले छात्र इस कोर्स को चुनना पसंद करते हैं. इसमें सीए की तरह काफी कठिन एंट्रेंस एग्जाम दिए जाते हैं.

बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स- बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स 3 साल की डिग्री होती है जिसमें आप इकोनॉमिक्स फाइनेंस और एनालिटिकल मैथड्स के बारे में पढ़ाई करते हैं. जो स्टूडेंट्स इकोनॉमिक्स में इंटरेस्ट रखते हैं वे बैचलर ऑफ इकोनॉमिक्स का ऑप्शन चुन सकते हैं. इस कोर्स के दौरान माइक्रो-इकोनॉमिक्स और मैक्रो-इकोनॉमिक्स की गहन स्टडी करते हैं. इसके बाद आपको फाइनेंस की फील्ड में नौकरी मिल जाती है.

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