IAS Success Story: हमेशा टॉप करने वाली सौम्या ने UPSC में भी बनाए रखा यह क्रम और पहली बार में बनीं टॉपर

Success Story Of IAS Topper Saumya Pandey: कुछ स्टूडेंट्स ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर लगता है कि ये पैदा ही सफल होने के लिए हुए हैं. हालांकि इन्हें मिलने वाली सफलता कोई कोइंसीडेंस नहीं होता बल्कि सालों की मेहनत और कमिटमेंट का परिणाम होता है. ऐसी ही एक स्टूडेंट से आज हम आपको मिलाने जा रहे हैं, जो वर्तमान में तमाम कीर्तिमान स्थापित करते हुए आईएएस के पद पर कार्यरत हैं. हम बात कर रहे हैं सौम्या पांडे की.

सौम्या इलाहाबाद की हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी यहीं से हुई है. बचपन से ही वे एकेडमिक्स में बहुत अच्छी थी जो आगे तक यूं ही बरकरार रहा. साल 2016 में मात्र 23 साल की उम्र में और अपने पहले ही अटेम्पट में सौम्या ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा में टॉप किया था. चौथी रैंक के साथ वे टॉपर बनीं और अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सौम्या ने अपना अनुभव शेयर किया.

 यहां देखें सौम्या पांडे द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू देख सकते हैं

सौम्या की सफलता का सफर –

सौम्या पढ़ाई में कैसी थी इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दसवीं और बारहवीं दोनों कक्षाओं में उन्होंने जिले में टॉप किया था. यानी दोनों ही जगह वे टॉपर बनीं. क्लास 10 में उनके 98 प्रतिशत अंक थे जबकि क्लास 12 में 97.8 प्रतिशत. इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन में इंजीनियरिंग विषय चुना और इलेक्ट्रिकल इंजीनयरिंग से ग्रेजुएशन पूरा किया. यहां भी उन्हें गोल्ड मेडल मिला यानी यहां भी वे टॉपर बनीं. इसके तुरंत बाद सौम्या ने एक साल का गैप किया यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. एक साल की कमिटेड तैयारी के बाद सौम्या ने पहला अटेम्पट दिया और पहले ही प्रयास में टॉपर बनीं.

प्री के लिए एनसीईआरटी और टेस्ट सीरीज है जरूरी –

सौम्या कहती हैं कि प्री परीक्षा की तैयारी के लिए बेसिक्स से शुरुआत करें. इसके लिए एनसीईआरटी से बेहतर कोई विकल्प नहीं है. इनसे पढ़ें और उसके बाद स्टैंडर्ड बुक्स पर जाएं. जब एक बार तैयारी किसी लेवल तक पहुंच जाए तो टेस्ट दें. टेस्ट सीरीज को सौम्या प्री के लिए बहुत जरूरी मानती हैं. वे कहती हैं इससे आपकी तैयारी पक्की हो जाती है, आपको अपनी कमियां पता चलती हैं और आप उन्हें समय रहते दूर कर पाते हैं.

जहां तक बात सी-सैट की है तो उसे सौम्या ज्यादा कठिन नहीं मानतीं. वे कहती हैं कि अगर आपके अपनी पिछली पढ़ाई ठीक से ही है तो क्वालीफाइंग नेचर के इस पेपर को पास करने में आपको बहुत दिक्कत नहीं होगी.

मेन्स होता है मुख्य टेस्ट –

प्री से ज्यादा जरूरी सौम्या मेन्स को मानती हैं जिसमें आपका प्रदर्शन आगे के द्वार खोलता है और रैंक लाने में भी अहम भूमिका निभाता है. वे कहती हैं इसके लिए सिलेबस अच्छे से पढ़ लें क्योंकि इतना कुछ है कोर्स में कि नहीं पढ़ेंगे तो जरूर कुछ न कुछ छूटेगा. एनसीईआरटी की किताबें यहां भी मदद करती हैं, इन्हें जरूर पढ़ें. मेन्स एग्जाम में ऐस्से एक ऐसा विषय होता है जिसमें कम मेहनत में आप अच्छा स्कोर कर सकते हैं. इसके लिए बस थोड़ी प्रैक्टिस की जरूरत पड़ती है. ऐस्से लिखने के पहले उसे फ्रेम जरूर कर लें.

इसके बाद जीएस के चारों पेपरों पर आएं और उनके लिए उपलब्ध स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी करें. अगर कहीं कुछ न मिले तो इंटरनेट की सहायता ले लें. सौम्या का ऑप्शनल ज्योग्राफी था, इसकी तैयारी भी उन्होंने एनसीईआरटी की किताबों से की.

न्यूज पेपर को मानती हैं बहुत जरूरी –

सौम्या बाकी किताबों के अलावा न्यूज पेपर को इस परीक्षा के लिए बहुत जरूरी मानती हैं. वे कहती हैं कि शुरू से पेपर पढ़ें और ठीक से पढ़ें तो आपको ज्यादा किताबों के पीछे नहीं भागना पड़ेगा और बहुत से टॉपिक इनसे ही कवर हो जाएंगे. खासकर एडिटोरियल अगर रेलिवेंट है या आपके विषय से संबंधित है तो उसे ध्यान से देखें.

रही बात एथिक्स की तो इसमें मुख्यतः केस स्टडी होती हैं, जिनके लिए भी आपको अभ्यास करना होगा. केस स्टडी की तैयारी करते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि उन्हें डेली लाइफ में किस प्रकार अप्लाई करेंगे.

सौम्या की सलाह –

इस एग्जाम में सही स्ट्रेटजी के साथ, पेशेंस के साथ और स्मार्टवर्क के साथ आगे बढ़ना सफल होने के लिए जरूरी होता है. सबसे जरूरी है धैर्य रखना क्योंकि कई बार सफलता मिलने में बहुत समय लग जाता है. इस दौरान कैंडिडेट्स को कई बार ऐसा लगता है कि वे नहीं कर पाएंगे, सौम्या को भी ऐसा लगा था पर ऐसे में हिम्मत न हारें. अपना इनर मोटिवेशन बनाएं रखें और इसे इतना तगड़ा रखें कि पूरे सफर के दौरान यह बार-बार आपको मोटिवेट करें और सफल न होने पर पर भी पीछे न हटने दे. सौम्या मानती हैं कि यह परीक्षा कठिन नहीं है पर इसे पास करने के लिए पेशेंस की बहुत जरूरत होती है. कुछ भी हो जाए किसी भी स्टेज पर हार न मानें.

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