बेकार पड़े खाते को करा दें बंद, इन बातों का जरूर रखें ध्यान

जॉब करने वाले लोगों के पास अक्सर एक से ज्यादा बैंक खाते होते हैं. कंपनी बदलने पर भी कई बार खाता बदल जाता है. नौकरी बदलने के बाद लोग पुराने खाते पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट में जब कुछ महीने सेलरी नहीं आती है तो कुछ बैंक इसे बचत खाते में बदल देते हैं. यह ध्यान रखें कि नॉन-सैलरी बचत खाते में मिनिमम बैंलेंस रखना जरूरी होता है. इस उन खातों को बंद करवा दें जिनका आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या जिनमें मिनिमम बैलेंस तक नहीं है.

खाता बंद करवाते वक्त इन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए.

डेबिट्स को डीलिंक करवाएं 

  • खाता बंद करवाते वक्त यह याद रखें कि अपने अकाउंट से लिंक सभी डेबिट्स को डीलिंक करवा लेना चाहिए.
  • अगर आपक बैंक खाता महीने के लोन इएमआई के लिए लिंक है, तो खाता बंद करवाने पर आपको लोन देने वाले बैंक या संस्था को वैकल्पिक बैंक अकाउंट नंबर देना चाहिए.

बैंक की ब्रांच जाएं और इन कामों को पूरा करें

  • खाताधारक को अपने बैंक की ब्रांच में जाना होगा
  • ब्रांच में अकाउंट क्लोजर फॉर्म को भरना होगा.
  • इस फॉर्म के साथ ही आपको डी-लिंकिंग फॉर्म भी सबमिट करना होता है.
  • उपयोग में नहीं आई चेक बुक, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड भी बैंक में जमा कराना होती है.

एंप्लायर को नए खाते की जानकारी दें

पुराना सैलरी अकाउंट बंद कराने पर एंप्लॉयर को नए अकाउंट डिटेल्स दे दें, ताकि आपकी सैलरी या पेंशन नए में आती रहे.

क्लोजर चार्ज

  • अगर आप सेविंग अकाउंट खुलवाने के 14 दिन के अंदर ही उसे बंद कराते हैं तो आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा.
  • 4 दिनों से लेकर एक साल के बीच में खाता बंद करवाने पर बैंक शुल्क लेते हैं.
  • अलग-अलग बैंकों का शुल्क अलग-अलग हो सकता है.
  • खाता खुलने के एक साल बाद बंद करवाने पर आमतौर पर बैंक कोई चार्ज नहीं लेते.

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