ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सामने खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं किसान, जानें- क्या है मांग

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण के सामने सैकड़ों की संख्या में किसान धरना प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं. किसानों की मांग है कि उन्हें नए भूमि अधिग्रहण बिल के तहत मुआवजा और पूरा लाभ दिया जाए. किसानों का आरोप है कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर में प्राधिकरण की तरफ से उनकी ली गई जमीन का उनको उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. किसानों की मांग है कि परिवार के सदस्यों को नौकरी और 20 प्रतिशत आबादी क्षेत्र में प्लॉट दिया जाए. इन तमाम मांगों को लेकर प्राधिकरण दफ्तर पर सैकड़ों की संख्या में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.

उचित मुआवजा नहीं दिया गया है

किसान अपनी मांगों को लेकर कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हुए है. ग्रेटर नोएडा प्राधिकार दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर बनाए जाने के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित कर रहा है. किसान नए भूमि अधिग्रहण कानून बिल के तहत मुआवजा चाहते हैं. 80 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण का हो चुका है. किसानों का कहना है कि प्राधिकरण की तरफ से किसानों से ली गई जमीन का उनको उचित मुआवजा नहीं दिया गया है, जिसको लेकर धरने पर बैठे हुए हैं.

जारी रहेगा प्रदर्शन

किसानों की मांग है कि 20 प्रतिशत आबादी क्षेत्र में प्लॉट, परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाए. किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण उनकी जमीन का 38सौ रुपए मीटर मुआवजा दे रहा है जो पूरी तरीह से गलत है. किसानों की मांग है कि उन्हें नए कानून बिल के तहत मुआवजा दिया जाए. उनका कहना है कि जबतक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाती हैं तब तक वो ठंड में खुले आसमान के नीचे प्रदर्शन जारी रखेंगे.

बेनतीजा रही हैं बैठकें

हालांकि, प्राधिकरण के अधिकारियों और किसानों की पांच दौर की बैठक हो चुकी है. लेकिन, ये सभी बैठकें बेनतीजा साबित हुई हैं. आगामी 24 जनवरी में प्राधिकरण के अधिकारियों से दोबारा किसानों की वार्ता होनी है. अब देखना ये है कि इस वार्ता में क्या नतीजा निकलता है.

ये भी पढ़ें:

यूपी में कोहरे और ठंड ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत, नाकाफी साबित हो रहे हैं प्रशासनिक इंतजाम

राम मंदिर निर्माण में नींव के काम को अंतिम रूप देने में हो रही देरी, जानें- क्या है वजह

Source link ABP Hindi


Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*