Health Tips: इन 7 कामों को करके अपने डाइजेस्टिव सिस्टम को बानाएं हेल्दी, अपच जैसी परेशानी भी होगी दूर

Health Tips: अपच वो आम समस्या है जो आपके खराब डाइजेशन से जुड़ी है. अक्सर खाना खाने के बाद लोगों को अपच की परेशानी से जूझना पड़ता है. ये परेशानी आपके पेट के ऊपरी हिस्से को घेर कर खाना खाने के काफी देर बाद तक भी आपको असहज महसूस करवाती है. वैसे तो अपच के मुख्य कारण तेज़ी से खाना खाना, मसालेदार, चिकना और फैटयुक्त खाना खाना या खाना खाते ही तुरंत बिस्तर पर लेट जाना आदि हैं. लेकिन इसके कारणों की लिस्ट यहाँ ख़त्म नहीं हुई है और भी ऐसे कई कारण है जिनसे अभी आप रूबरू नहीं है. तो चलिए आज अपच के इन्हीं कारणों को जानते हैं और साथ ही उन 7 तरीकों के बारे में भी जानेंगे जिन्हें आज़मा कर आप अपच से अपना पीछा छुड़ा सकते हैं.

1. अपच होने के अन्य कारण

– खाने की नली में खाना ऊपर की ओर लौटना, गैस्ट्रिक प्रॉब्लम

– पेप्टिक अल्सर की बीमारी, टीबी / सारकॉइडोसिस, पैरासिटिक इंफेक्शन

– डायबिटीज, स्क्लेरोडर्मा, हाइपोथायरायडिज्म

– दवाएं

– पेट के ऊपरी हिस्से में सूजन, पेट में दर्द, पेट में जलन, जी मिचलाना, उल्टी, सीने में जलन

– निगलने में परेशानी, कब्ज

– भूख न लगना, खट्टी डकारें आना, पेट में भारीपन महसूस होना

– लगातार बेचैनी रहना, पसीना अधिक आना

– नींद नहीं आना

2. डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने के तरीके

हाई फैट लेना बंद करें

हाई फैट पेट के लिए बेहद खराब माना जाता है. ऐसा इसलिए क्यों वसायुक्त खाद्य पदार्थ आमतौर पर डाइजेशन प्रोसेस को धीमा कर देते हैं. जिससे कब्ज की परेशानी खड़ी हो जाती जो अपच को पैदा करती है. इसलिए हाई फैट वाले फ़ूड आइटम्स को अपनी डाइट में शामिल करने से आपको बचना चाहिए.

खाने में रफेज की मात्रा बढ़ाएं

पेट को ठीक रखना है तो खाने में रफेज की मात्रा बढ़ाएं. इसके लिए अपनी डाइट में सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और फलियों की मात्रा बढ़ाएं. ये कब्ज, आंत्र सिंड्रोम, बवासीर, और डायवर्टीकुलोसिस जैसी डाइजेस्टिव कंडीशन्स का इलाज और रोकथाम करने में मदद करता है. इसके अलावा, ये मेटाबोलिज्म को ठीक रखते हुए वजन कंट्रोल करने में भी मददगार है.

खूब पानी पिएं

पानी आपके पेट के लिए हर तरह से फायदेमंद है. पानी डाइजेस्टिव सिस्टम में जाकर खाने को अच्छे से पचाने में मदद करता है. पानी नरम, भारी मल बनाने के लिए फाइबर के साथ मिल जाता है और पेट साफ कर देता है. इसलिए एक दिन में 8 गिलास पानी पीने की आदत डालें.

डाइट में प्रोबायोटिक्स को शामिल करें

आपकी आंत स्वाभाविक रूप से स्वस्थ बैक्टीरिया से भरी होती है जो एंटीबायोटिक्स, तनाव और खराब आहार के प्रभावों का मुकाबला करके आपके शरीर को स्वस्थ रखने का काम करती है. पर जब ये गुड बैक्टीरिया शरीर में कम होने लगते हैं, तो डाइजेस्टिव सिस्टम कमजोर होने लगता है. इसलिए जरूरी है कि आप डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए अपने खाने में प्रोबायोटिक्स की मात्रा बढ़ाएं. इनका सेवन आपकी आंत में एक स्वस्थ माइक्रोबायोम को बनाए रखने में मदद करेगा. इसके लिए दही, फर्मेंटेड फूड्स और ठंडा चावल खाएं.

धूम्रपान न करें और कैफीन युक्त चीजों से भी बचें

धूम्रपान आपके पूरे शरीर को खराब कर सकता है. ये न सिर्फ आपके फेफड़ों, लिवर और किडनी को प्रभावित करता है, बल्कि ये आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाता है. ये आपके पेट के पीएच को बिगाड़ता है और माइक्रोबायोम को भी अनबैलेंस करता है. इसलिए शराब आदि के सेवन से बचें.

खाने में इन चीजों को ज़्यादा खाएं

– हल्के और नरम फूड्स जैसे उबले हुए चावल, सब्जियों का सूप, केला, पपीता, उबली हुई सब्जियां, सेब की चटनी, अनानास और दही आदि ही खाएं

– रेशे वाली चीजें ज़्यादा मात्रा में खाएं

– चोकर वाले आटे की रोटी खाएं

– खाने के बाद थोड़ा बहुत ज़रूर टहलें

– दलिया, मूंग की दाल और खिचड़ी खाएं

– छाछ में काला नमक डाल कर पिएं

एक्सरसाइज और योग करें

अपच और कब्ज की परेशानी उन लोगों को ज़्यादा होती है, जो कि एक एक्टिव लाइफस्टाइल नहीं फॉलो करते हैं. ऐसे में आप फिजिकल एक्टिविटीज को तवज्जो दें. इसके अलावा, रोजाना योग या एक्सेसाइज़ करने की आदत डालें. ये आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को तेज करेगा और बदहजमी की परेशानी को कम करेगा.

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