महाराष्ट्र कैबिनेट की ‘शक्ति कानून’ को मंज़ूरी, महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध के लिए किए गए हैं कड़े प्रावधान

मुंबई: महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में ‘शक्ति कानून’ को मंजूरी दे दी गई है. इसे अब आगामी विधानसभा सत्र में टेबल कर इस पर चर्चा कर इसे क़ानून का स्वरूप दिया जाएगा. आंध्र प्रदेश के दिशा कानून की तर्ज पर शक्ति कानून ड्राफ़्ट बनाया गया है. महिला और बच्चों पर होने वाले अत्याचार को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार की यह पहल है. इस कानून के तहत 21 दिनों के अंदर महिला और बच्चों पर होने वाले अत्याचार पर कारवाई होगी, साथ ही और भी कठोर नियमों का प्रावधान है.

शक्ति एक्ट 2020 में क्या-क्या प्रावधान रखे गए हैं

बेहद गंभीर और घृणित अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. ऐसे बेहद गंभीर अपराध की जांच के लिए 15 दिन की समय सीमा रखी गई है. योग्य कारण का हवाला देते हुए जांच के लिए सात दिन बढ़ाए जाने का प्रावधान इसमें रखा गया है.

ऐसे घृणित अपराधों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट की सुनवाई प्रतिदिन होगी और सुनवाई 30 दिनों में पूरी हो जाएगी. कोर्ट से सजा सुनाए जाने के 45 दिन के भीतर फाइल पूरी कर ली जाएगी/बंद कर दी जाएगी, जिसके लिए पहले 6 महीने की कालावधी थी.

आंध्र प्रदेश के दिशा एक्ट से प्रेरणा लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस एक्ट का नाम प्रस्तावित किया है, जिसका नाम स्पेशल कोर्ट एंड मशीनरी फोर द इम्पलेमेंटेशन ऑफ शक्ति एक्ट 2020 (Special Courts and Machinery for the Implementation of Shakti Act 2020) है.

शक्ति एक्ट के अंतर्गत यह प्रस्ताव दिया गया है कि हर जिले में स्पेशल कोर्ट, विशेष पुलिस टीम होगी. पीड़ित महिला और बच्चों की सहूलियत और सुविधा के लिए विशेष संस्था का गठन किया जाएगा. एसिड अटैक के मामलों में धारा गैर जमानती होगी, जिसमें सजा का प्रावधान 10 साल से कम का नहीं होगा.

इसके अतिरिक्त मौत की सजा का प्रावधान होगा और पीड़िता को आर्थिक मुआवजा देने का प्रावधान होगा. जुर्माना 100 लाख रुपये तक का होगा, जो कि पीड़िता के प्लास्टिक सर्जरी और चेहरे के पुनर्निर्माण के लिए होगा. इस प्रस्ताव में गैंग रेप और रेप जैसे अपराधों को भी जोड़ा गया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र की महिला के साथ रेप के मामले में 12 साल की सजा का प्रावधान है.

सोशल मीडिया सहित संचार के किसी भी माध्यम द्वारा किसी महिला के साथ किया गया दुर्व्यवहार या शोषण के लिए 2 साल की सजा का प्रावधान है और एक लाख रुपये का जुर्माना. यहां तक कि सरकारी कर्मचारी अगर जांच में सहयोग नहीं करता, तो उसके लिए भी 6 महीने की सजा का प्रावधान है, जिसे 2 साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

आईपीसी की धारा 354 में सेक्शन ‘E’ को जोड़ा जाएगा, जिसके अंतर्गत सोशल मीडिया, टेलीफोन या अन्य डिजिटल माध्यम के द्वारा प्रताड़ना, आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी के मामलों में केस दर्ज किया जाएगा.

शक्ति क़ानून पर कैबिनेट की मुहर लगाने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री यशोंमती ठाकुर ने कहा कि महा विकास अघाड़ी की सरकार केवल बोलती नहीं, कर के भी दिखाती है. उन्होंने इस क़ानून को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कानून बताया है.

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