IAS Success Story: कई बार असफल होने के बावजूद अमित ने नहीं पीछे किए कदम और इस स्ट्रेटजी के साथ बनें UPSC टॉपर

Success Story Of IAS Topper Amit Kale: यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा की अनप्रिडेक्टेबिलिटी के बारे में हर कोई जानता है. कभी प्री परीक्षा पास नहीं होती तो कभी मेन्स क्लियर नहीं होता तो कई बार सारे राउंड पास होने के बाद भी सेलेक्शन नहीं होता. कई कैंडिडेट्स तो ऐसे होते हैं जो एक साल इंटरव्यू राउंड तक पहुंचकर भी अगले साल प्री में अटक जाते हैं. ऐसे में अमित काणे का मामला कुछ खास दिखायी पड़ता है, जिसमें उन्होंने चार बार प्री परीक्षा दी और चारों बार सेलेक्ट हुए. कभी मार्जिन कम रहा कभी ज्यादा पर सेलेक्शन हर बार हुआ. इन चार अटेम्प्ट्स में से दो बार अमित प्री परीक्षा पास करके ही रुक गए और दो बार सारे चरण पास करते हुए रैंक होल्डर बने.

साल 2018 में जब अमित का फाइनल सेलेक्शन हुआ और वे 2019 बैच के आईएएस बने उस समय वे इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विसेज में ट्रेनिंग ले रहे थे. साल 2017 में भी उनका चयन हुआ था और इस साल आयी रैंक के तहत उन्हें यह सेवा एलॉट हुई थी. चूंकि अमित इस रैंक से खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने फिर से परीक्षा दी.

देखें अमित काणे द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

ढ़ाई से तीन महीने पहले शुरू करते थे तैयारी –

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में अमित ने प्री परीक्षा की तैयारी से जुड़े विभिन्न पहलू साझा किए. उन्होंने कहा कि वे हर साल प्री परीक्षा से करीब ढ़ाई से तीन महीने पहले तैयारी शुरू कर देते थे. कोशिश यह रहती थी कि परीक्षा के पहले कम से कम तीन से चार रिवीजन हो जाएं.

वे पूरा शेड्यूल प्लान करते थे कि पहली बार शुरू की पढ़ाई इतने दिन में खत्म करनी है. दूसरा रिवीजन इतने दिन में और इसी तरह तीसरा और चौथा रिवीजन प्लान होता था. कुल मिलाकर परीक्षा वाले दिन के पहले वे सारा सिलेबस कई बार दोहरा चुके होते थे.

वे कहते भी हैं कि पहली बार सिलेबस खत्म करने में समय लगता है लेकिन फिर धीरे-धीरे दूसरे में उससे कम और तीसरे चौथे तक आते-आते समय कम ही होता चला जाता है.

डिफिकल्ट एरिया को रखते थे एंड के लिए –

अमित कहते हैं कि हर कैंडिडेट का तैयारी का अपना तरीका होता है और हर किसी के कठिन और आसान विषय अलग होते हैं. अपने केस में वे बताते हैं कि जो विषय मुझे अधिक कठिन लगते थे उन्हें मैं हमेशा अंत में पढ़ने के लिए बचाकर रखता था ताकि परीक्षा वाले दिन कुछ न भूलें. पहले पढ़ने पर उन्हें परीक्षा वाले दिन भूलने की संभावना रहती थी.

ठीक इसी प्रकार वे फिगर्स, फैक्ट्स, डेटा को भी अंत में रिवाइज करने की सलाह देते हैं. वे कहते हैं कि चूंकि ये नंबर होते हैं इसलिए कैंडिडेट इन्हें भूल सकता है. बेहतर होगा अंत में इनका रिवीजन करें. मैप्स भी एक ऐसा एरिया हैं, जिन्हें अंत में जरूर रिवाइज करें वरना भूल जाएंगे. मैप से भी हर साल तीन या चार प्रश्न आते ही हैं.

पिछले साल के प्रश्न-पत्र देखें –

अमित का मानना है कि पिछले चार-पांच साल के प्रश्न-पत्र देखें इनसे बहुत लाभ मिलता है. इनका एक फायदा तो यह है कि आपको प्रश्नों का प्रारूप पता चलता है और दूसरा यूपीएससी प्री परीक्षा में कई बार ऐसा देखा गया है कि पिछले साल के प्रश्न रिपीट हो जाते हैं. ऐसे में कम से कम तीन या चार प्रश्न भी अगर आपको मिल गए जो पहले आ चुके हैं और आपको उनका उत्तर पता है तो ये नंबर एक बड़ा अंतर क्रिएट करते हैं. इसलिए पिछले साल के क्वैश्चन पेपर देखें और सिलेबस के अनुसार किताबें चुनकर तैयारी करें.

किताबों की संख्या सीमित रखें और इस परीक्षा के लिए जरूर मानी जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों को पढ़ें लेकिन हर विषय की एनसीईआरटी की किताबें देखने की आवश्यकता नहीं है. कुछ विषयों की तैयारी स्टैंडर्ड बुक्स से भी हो सकती है.

अमित की सलाह –

अमित तैयारी करने के अलावा कैंडिडेट्स को शांत रहने की सलाह देते हैं. वे कहते हैं कई बार कैंडिडेट्स परीक्षा के पहले पैनिक कर जाते हैं जिससे उनका प्रदर्शन खराब हो जाता है. उनके खुद के साथ ऐसा हो चुका है. वे कहते हैं परीक्षा देने ऐसे जाओ जैसे मॉक टेस्ट दे रहे हों, अगर डरोगे या घबराओगे तो कुछ सवाल तो गलत होने ही हैं. इनमें भी कई बार आते हुए प्रश्न भी कैंडिडेट हड़बड़ी में गलत कर आते हैं. इसलिए परीक्षा वाले दिन काम और कंपोस्ड रहने की बहुत जरूरत है. एक तय समय पर तैयारी शुरू करें, सभी विषयों को कवर करके पढ़ें और जिसके लिए जितना जरूरी है उतनी ही किताबें लें बहुत मैटीरियल इकट्ठा न करें. कहीं फंसे तो इंटरनेट की मदद लें और टेस्ट सीरीज जरूर दें ताकि परीक्षा वाले दिन के पहले तक टाइम मैनेजमेंट सीख लें.

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