केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बोले- भारत बन रहा आत्मनिर्भर, चीन से आयात करने की जरूरत नहीं

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निर्यात बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) उपक्रमों की भूमिका रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को चीन से आयात करने की जरूरत नहीं हैं.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा, ‘‘वाहन क्षेत्र में पहले ही और कृषि जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी हम हर जगह पहले ही समाधान प्राप्त कर चुके हैं. अब हमें चीन से आयात करने की जरूरत नहीं है.’’

भारत अब कर रहा बहुत सारे सामानों का निर्यात

गडकरी ने कहा कि भारत बहुत सारे सामानों का आयात करने के बजाय निर्यात कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘अत: मैं चीन या किसी अन्य चीज के बारे में कोई बात नहीं करना चाहूंगा. हर देश की अपनी नीति होती है. जहां तक भारतीय नीतियों का सवाल है, हम प्रौद्योगिकी को अपना रहे हैं, लागत को घटा रहे हैं और अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद बना रहे हैं. हमारी शक्ति युवा प्रतिभावान श्रमबल है, जो यहां उपलब्ध है.’’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके साथ-साथ हमारे आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र काफी इनोवेशन कर रहे हैं. उन्होंने भरोसा जाहिर किया कि यह भारत को पूरी दुनिया की जरूरतें पूरा करने में मदद करेगा.गडकरी ने कहा कि अभी ज्यादातर देश चीन के साथ काम करना नहीं चाहते हैं. वे इसके बजाय भारत में दिलचस्पी रखते हैं.

विनिर्माण क्षेत्र के पास निर्यात को प्रोत्साहन देने का अवसर

मंत्री ने इस बात का भी भरोसा जाहिर किया कि भारत को कोविड-19 का टीका ‘जितना जल्दी संभव है’ मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हम महामारी को नियंत्रित कर लेंगे और ‘आर्थिक युद्ध’ में जीत हासिल करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे में देश के विनिर्माण क्षेत्र के पास अपनी क्षमता बढ़ाने और देश से निर्यात को प्रोत्साहन देने का अवसर है.

गडकरी ने सोमवार को डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के एक ‘ऑनलाइन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हमें वैक्सीन जल्द से जल्द मिल जाएगी. शत प्रतिशत हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई जीतेंगे और साथ ही आर्थिक युद्ध में भी विजय हासिल करेंगे.’’

1.48 लाख करोड़ रुपये का लोन वितरित

गडकरी ने बताया कि केंद्र की ओर से कंपनियों के लिए घोषित बिना गारंटी वाले तीन लाख करोड़ रुपये के ऋण में से 1.48 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है.

मंत्री ने कहा, ‘‘हमने चीन से अपना आयात घटाया है. निर्यात भी बढ़ रहा है. अभी तक का रुख सकारात्मक है और मुझे इस क्षेत्र में अच्छे नतीजों की उम्मीद है. ’’ उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट के बावजूद सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उपक्रम (एमएसएमई) क्षेत्र अच्छा काम कर रहा है. इस योजना के तहत एमएसमएई इकाइयां, कारोबारी उपक्रम, कारोबार के उद्देश्य से व्यक्तिगत ऋण और मुद्रा ऋण लेने वाले कर्ज ले सकते हैं.

एमएसएमई क्षेत्र के लिए योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर गडकरी ने कहा, ‘‘हमने उनके लिए 93 योजनाएं मंजूर की हैं. करीब 100 योजनाएं पाइपलाइन में हैं. हम इन योजनाओं को भी जल्द लागू करने की तैयारी कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि कच्चे तेल जैसे उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

गडकरी ने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों मसलन आईआईटी और एनआईआईटी के साथ मिलकर विशिष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग का मौजूदा वार्षिक कारोबार 80,000 करोड़ रुपये का है. इसे अगले दो साल में बढ़ाकर पांच लाख करोड़ रुपये करने की योजना है.

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