कौन थे संत बाबा राम सिंह, जिन्होंने के किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर पर खुद को मारी गोली

नई दिल्ली: सिंघु बार्डर पर किसानों के धरने में शामिल संत बाबा राम सिंह ने किसानों के समर्थन में खुद को गोली मार ली. जिस वजह से उनकी मौत हो गई है. संत बाबा रामसिंह सिंगड़ा वाले बाबा जी के नाम से प्रसिद्ध थे. उनका डेरा करनाल जिले में निसंग के पास सिंगड़ा गांव में है. उन्हें संत बाबा राम सिंह ‘सिंगड़ा वाले’ के नाम से ही जाना जाता था. संत रामसिंह दुनियाभर में प्रवचन करने के लिए जाते थे. वह नानकसर संप्रदाय से जुड़े हुए थे.

बताया जा रहा है कि वह किसान समस्याओं और मौजूदा किसान आंदोलन को लेकर काफी दुखी थे. राम सिंह ने कथित सुसाइड नोट भी छोड़ा है. उन्होंने लिखा, “किसानों का दुख देखा है अपने हक के लिए सड़कों पर उन्हें देखकर मुझे दुख हुआ है. सरकार इन्हें न्याय नहीं दे रही है जो कि जुल्म है जो जुल्म करता है वह पापी है जुल्म सहना भी पाप है किसी ने किसानों के हक के लिए तो किसी ने जुल्म के खिलाफ कुछ किया है. किसी ने पुरस्कार वापस करके अपना गुस्सा जताया है किसानों के हक के लिए, सरकारी जुल्म के गुस्से के बीच सेवादार आत्मदाह करता है यह जुल्म के खिलाफ आवाज है यह किसानों के हक के लिए आवाज है वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह.”

पुलिस ने क्या कहा

सोनीपत पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि करनाल के गांव सिंगरा के गुरुद्वारा संचालक संतराम ने खुद को गोली मार कर कर आत्महत्या कर ली है. उनके शव का करनाल के कल्पना चावला अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है. मामले की जांच की जा रही है.

राहुल गांधी ने जताया दुख



संत बाबा राम सिंह की खुदकुशी पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दुख जताया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की क्रूरता हर हद पार कर चुकी है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, ”करनाल के संत बाबा राम सिंह जी ने कुंडली बॉर्डर पर किसानों की दुर्दशा देखकर आत्महत्या कर ली. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ और श्रद्धांजलि.” उन्होंने आगे कहा, ”कई किसान अपने जीवन की आहुति दे चुके हैं. मोदी सरकार की क्रूरता हर हद पार कर चुकी है. ज़िद छोड़ो और तुरंत कृषि विरोधी क़ानून वापस लो!”

गौरतलब है कि सितंबर में संसद की तरफ से पास तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों की संख्या में पंजाब और हरियाणा से किसान दिल्ली के पास आकर प्रदर्शन कर रहे हैं और इन तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

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