फेसबुक नई तकनीक पर कर रहा है काम, मानव मस्तिष्क को पढ़ा जा सकेगा

नई दिल्लीः फेसबुक एक ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश में है जिससे मानव मस्तिष्क को पढ़ा जा सके. दरअसल फेसबुक एक नया न्यूरल सेंसर बनाने की योजना बना रहा है जो लोगों के दिमाग को पढ़ सके. यह नया प्रोजेक्ट सोशल मीडिया की इस दिग्गज कंपनी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डोमेन में आगे बढ़ाएगा.

फेसबुक ने एक नए टूल की भी घोषणा की है जो न्यूज आर्टिकल्स को बुलैट्स में समराइज करेगा. इससे पाठकों को अधिक समय खर्च नहीं करना पड़ेगा. फेसबुक का यह कदम प्रकाशकों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावित कर सकता है.

ये घोषणाएं फेसबुक की सालाना बैठक में की गईं. इसमें कंपनी में काम करने वाले सभी लोग शामिल थे. बैठकों की डिटेल्स पब्लिकली उपलब्ध नहीं है. लेकिन बज़फीड न्यूज ने ऑडियो रिकॉर्डिंग हासिल की है जो सभी कर्मचारियों के लिए प्रसारित किया गया था. फेसबुक ने कुछ सीरियस योजनाओं का खुलासा किया है जो एआई कैटेगरी में अपग्रेडेशन से जुड़ी हैं.

सीटीआरएल लैब्स के जरिए होगा न्यूरल सेंसर का डेवलपमेंट

न्यूरल सेंसर को सीटीआरएल लैब्स कंपनी के संसाधनों का उपयोग करके विकसित किया जाएगा. इस कंपनी को फेसबुक ने 2019 में अधिग्रहित किया था. रिपोर्ट के अनुसार, सेंसर मस्तिष्क से न्यूरल सिग्नल्स को रीढ़ की हड्डी और आर्म्स के माध्यम से कलाई तक ले जाएगा. यह यूजर्स को अपने विचारों के आधार पर फिजिकल एक्शन करने के लिए अलाउ करेगा.

फेसबुक के अनुसार, यह यूजर को एक वर्चुअल ऑबजेक्ट रखने, टाइप करने और वीडियो गेम में एक करैक्टर को कंट्रोल करने में मदद करेगा. यह नवजात मस्तिष्क पढ़ने की तकनीक के समान है जिस पर एलन मस्क की न्यूरलिंक कंपनी पर काम कर रही है. यह देखना दिलचस्प होगा कि फेसबुक इस तकनीक को क्या स्पिन देती है.

कंपनी कर रही है कई विवादों का सामना

फेसबुक ने खुद कई विवादों में फंसा हुआ है.इसमें भारत में राजनीतिक झुकाव, कर्मचारियों में असंतोष भी शामिल है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका और अन्य जगहों पर डोमिनेंस के मामले भी हैं. विवादों में से एक अभद्र भाषा को हटाना था जिसमें एआई-पावर्ड टूल्स का महत्वपूर्ण रूप से उपयोग होता है. न्यूज आर्टिकल्स के समराइज ऐप सहित एआई प्रोडेक्ट्स को कवर करने के लिए फेसबुक अब अपनी सीमा का विस्तार कर रहा है. इस साल 20,000 कर्मचारी फेसबुक से जुड़े हैं और महामारी के कारण लोग फेसबुक और उसकी सर्विसेज का पहले से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.

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