देशभर के कुलियों ने भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार, रोजी-रोटी के पड़े लाले

नई दिल्लीः कोरोना संकट के बाद रेलवे विभाग भले ही धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा हो, देश में चारों तरफ रेलगाड़ियां दौड़ने लगी हो, यात्री यात्रा करने लगे हो लेकिन रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले उन लाल वर्दीधारी कुलियों की हालत इतनी खस्ताहाल हो गई है कि अब उनकी रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं क्योंकि रेलवे स्टेशन पर सामान ले जाने और ले आने की तमाम सुविधाएं रेलवे विभाग की तरफ से मुहैया कराई जा रही हैं.

ज्यादातर यात्री अपना सामान खुद ले जाने की कोशिश करते हैं और ऐसे में इन रेलवे स्टेशन में काम करने वाले कुली लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और अब सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी मदद की जाए.

सरकार के यात्रियों को बैग ऑन व्हील की सुविधा देने से छिन रहा रोजगार

ऑल इंडिया लाल वर्दी कुली यूनियन ने भारत सरकार को एक खत लिखा है और जिस में कहा गया है कि रेलवे विभाग रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को जो बैग ऑन व्हील की सुविधा दे रही है, उसकी वजह से रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले लाल वर्दीधारियों का रोजगार छिन रहा है.

कुली यूनियन के मुताबिक इस सुविधा के तहत यात्रियों का सामान रेलवे स्टेशन से उनके घर तक पहुंचाने और लाने की सुविधा दी जाती है, जिससे यात्रियों और रेलवे दोनों को फायदा होगा, लेकिन रेलवे की इस सुविधा से उनका रोजगार छिन रहा है. उनका कहना है कि सरकार यात्रियों को सुविधा दें हम इसका विरोध नहीं करते हैं लेकिन वह हमारा भी ध्यान रखें क्योंकि इसी रेलवे स्टेशन से हमें भी रोजी रोटी मिलती है. पूरे करोना काल में सरकार ने रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले कुलियों की हालत पर कभी भी ध्यान नहीं दिया और उन्हें किसी भी तरह की मदद नहीं की गई जबकि कई महीनों तक ट्रेनें बंद रही .

यूनियन के मुताबिक रेलवे स्टेशन पर रेल मंत्रालय की तरफ से तमाम सुविधाएं दे दी गई हैं. रेलवे स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियां, लिफ्ट ,बैटरी वैन, बैग ऑन व्हील, इन सब की वजह से यात्रियों को तो भले ही सुविधा मिली है लेकिन कुलियों का रोजगार छिन गया है.

देश में 20000 रजिस्टर्ड कुली

भारत सरकार और रेल मंत्रालय को खत लिखकर ऑल इंडिया लाल वर्दी कुली यूनियन ने मांग की है कि रेलवे विभाग यदि सभी रेलवे स्टेशनों पर बैग ऑन व्हील की सुविधा शुरू कर रही है तो हम जैसे कुलियों को भी उसमें रोजगार दिया जाए. हमें रेलवे विभाग में प्रमोट और परमानेंट किया जाए. क्योकि अभी ये प्रणाली को ठेकेदार चला रहे है और उनके अंडर में हमें काम करना मंजूर नहीं.

हम आपको बता दें कि पूरे भारत के स्टेशनों पर करीब 20000 कुली काम करते हैं जो रेलवे में रजिस्टर्ड हैं और इसको कोरोना संकट में इन कुलियों के सामने भारी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

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