बिहार: ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कतों से परेशान NMCH अधीक्षक ने DM को लिखा पत्र, कही ये बात

<p style="text-align: justify;"><strong>पटना:</strong> बिहार में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है. मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ रही है. लेकिन, मांग के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन भी परेशान है. सूबे की राजधानी पटना स्थित एनएमसीएच में ऑक्सीजन का फिर संकट बढ़ गया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एनएमसीएच के अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने रविवार को पटना के जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर निर्बाध तौर पर ऑक्सीजन आपूर्ति की मांग की है. अधीक्षक ने अपने पत्र में कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन 1000 सिलेंडर की खपत है. लेकिन सिलेंडरों की आपूर्ति में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आपातकालीन स्थिति के लिए रखे जाने चाहिए 250 सिलेंडर&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अधीक्षक ने बताया कि लगातार सप्लाई के साथ ही 250 सिलेंडर आपातकालीन स्थिति के लिए भी रखे जाने चाहिए. उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित कराए जाने की मांग करते हुए, इस पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">बता दें कि ऑक्सीजन की समस्या की जानकारी अधीक्षक ने जिलाधिकारी के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी पत्र के माध्यम से दे दी है. मालूम कि पटना स्थित एनएमसीएच कोविड डेडिकेटेड अस्पताल है. कोरोना मरीजों के इलाज के लिए यहां 400 बेड की सुविधा दी गई है. लेकिन ऑक्सीजन समेत अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी की वजह से डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने में परेशानी हो रही है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डॉक्टरों ने बताई थी ये परेशानी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बीते दिनों डीएम के साथ हुई बैठक में अस्तपाल के जूनियर डॉक्टरों ने अपनी कई समस्याएं बताई थीं. उन्होंने कहा था कि अस्पताल में पिछले साल की तुलना चार गुना अधिक मरीज हैं, और स्टाफ एक-तिहाई. एमबीबीएस फाइनल ईयर का एग्जाम नहीं होने की वजह से 150 इंटर्न नहीं आ पाए हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">नॉन-एकेडमिक जेआर का टेन्योर खत्म हो गया है. उसे भी बढ़ाया नहीं गया है. केवल पीजी के स्टूडेंट्स अकेले 400 कोविड बेड नहीं संभाल सकते. वार्ड अटेंडेंट्स की भी कमी है. नर्सेज की भी कमी है. बाईपेप मशीन नहीं हैं. ऐसे में अगर ये सारी कमियां दूर हो जाएं तो इलाज करने में भी सहूलियत होगी और हंगामा भी कम होगा.</p>
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