कितना कामयाब हो पायेगा एक मई से शुरु होने वाला वैक्सीन अभियान?

नई दिल्लीः कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिये वैक्सीनेशन के तीसरे व अब तक के सबसे बड़े अभियान के शुरु होने से पहले ही कई तरह के रोड़े सामने आने लगे हैं.एक मई से 18 से 45 साल की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगनी है और 28 अप्रैल से इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो जायेगा. दिल्ली समेत कई राज्यों ने इसे मुफ्त में लगाने का एलान तो कर दिया है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियों के पास इतनी बड़ी मात्रा में इसकी उपलब्धता है कि वे सभी राज्यों को वक़्त पर इसकी आपूर्ति कर पाएंगी? दूसरा अहम सवाल यह भी कि किन राज्यों को पहले वैक्सीन मिलेगी, यह कौन तय करेगा,उत्पादक कंपनियां या फिर केंद्र सरकार?           

वैक्सीन की अलग-अलग कीमत को लेकर केंद्र व राज्यों की तकरार अभी खत्म भी नहीं हुई है कि इस बीच कांग्रेस शासित राज्यों ने यह कहते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए हैं कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन नहीं दी जा रही है. लिहाज़ा जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं है,वहां इस अभियान के सफल होने पर अभी से सवालिया निशान लग गया गया है.

पंजाब,राजस्थान,महाराष्ट्र,झारखंड व छत्तीसगढ़ ने वैक्सीन की उपलब्धता पर चिंता जताई है और कहा है कि यदि उन्हें समय पर यह नहीं मिलेगी,तो पूरे अभियान का मकसद ही बेकार ही जायेगा.झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने तो यह तक आरोप लगा दिया है कि केंद्र सरकार ने दोनों वैक्सीन कंपनियों के उत्पादन को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया है. हम दोनों कंपनियों को पूरा पैसा देने को तैयार हैं लेकिन उनका रवैया टालमटोल वाला है.केंद्र सरकार को यह वैक्सीन कांग्रेस शासित प्रदेश को भी उसी अनुपात में आवंटित करवानी चाहिए और इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिये.

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा का बयान तो और भी ज्यादा हैरान करने वाला है.उनके मुताबिक केंद्र सरकार कह रही है कि एक मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी. जबकि मैंने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी) से बात की थी. हमें बताया गया है कि भारत सरकार ने जो भी ऑर्डर प्लेस किए हैं उसे पूरा करने में 15 मई तक का समय लग सकता है. वे राजस्थान को इससे पहले वैक्सीन नहीं दे सकते हैं. राज्य में करीब दो करोड़ 90 लाख लोगों का फ्री वैक्सीनेशन होगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वैक्सीनेशन के लिए 3000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की बात कही है.

वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हम 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन 1 मई से वैक्सीनेशन शुरू नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हैं. छत्तीसगढ़ से स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह ने भी यही बात कही है. उन्होंने कहा है कि हमारे पास वैक्सीन मौजूद नहीं है इसलिए एक मई से शुरू होने वाले वैक्सीनेशन अभियान को हम लोग लागू नहीं कर सकते हैं.

उधर,पंजाब भी वैक्सीन के संकट से जूझ रहा है और वहां भी एक मई से इस अभियान के शुरु होने के आसार काम ही हैं. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि हमारे पास 4 लाख वैक्सीन ही बची हैं. अब जब तक केंद्र की तरफ से हमें और वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक एक मई से सबको टीका कैसे लगा सकते हैं? पंजाब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि अगर वैक्सीन उपलब्ध नहीं है तो उसे देने का हमारे पास कोई तरीका नहीं है. केंद्र सरकार ने कह दिया है कि 1 मई से सभी को वैक्सीन दी जाएगी, लेकिन वैक्सीन तो मौजूद ही नहीं है.

उधर,केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि राज्य सरकारों को टीका खरीदने के लिए कहा गया है लेकिन, कोरोना के कारण राज्य पहले से ही वित्तीय बोझ से गुजर रहे हैं.ऐसे में,राज्यों को आर्थिक संकट की ओर से धकेलने के बजाय केंद्र को राज्यों को मुफ्त में टीका देना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि एक मई से देश के करीब 82 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जानी है जिसकी दो खुराक के लिए 164 करोड़ डोज़ तैयार करनी होगी.इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन किसी चुनोती से कम नहीं है.जिन राज्यों ने वैक्सीन निर्माताओं को पहले आर्डर दे दिए थे,जाहिर है कि उन्हें पहले यह उपलब्ध होगी.

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