उत्तर प्रदेश: सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने 1825 हाट मिक्स सड़कों का किया शिलान्यास, 3.15 करो़ड़ होंगे खर्च

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्‍तर प्रदेश में जिला पंचायतों की ओर से बनने वाली 1825 हाट मिक्स सड़कों का शिलान्‍यास रविवार को किया है. इनमें गोरखपुर की भी 21 सड़कें शामिल हैं. इन सड़कों की लम्‍बाई 26.48 किमी होगी. इन पर 3.15 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

इस दौरान सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने पीएमजीएसवाई की दो सड़कों का भी शिलान्‍यास किया. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने वर्चुअल माध्‍यम से लखनऊ से इन सड़कों का शिलान्‍यास किया. गोरखपुर के कलेक्‍ट्रेट परिसर स्थित एनआईसी सभागार में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से आनलाइन 21 सड़कों का मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शिलान्‍यास किया. इस दौरान सांसद, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सेंटर पर मौजूद रहे.

सड़कें लगभग  3,14,68,000 रुपए लागत से तैयार होंगी

गोरखपुर के जिला पंचायत परिसर में मुख्‍य रूप से सांसद रवि किशन, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक संत प्रसाद, विधायक महेंद्र पाल सिंह, विधायक विपिन सिंह, संगीता यादव और विधायक शीतल पांडेय मौजदू रहे. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जिला पंचायतों की ओर से हॉट मिक्स प्लांट से बनने वाली सड़कों का वर्चुअल शिलान्यास किया. इन सड़कों की कुल लंबाई 26.48 किलोमीटर है. ये सड़कें लगभग  3,14,68,000 रुपए लागत से तैयार होंगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंचायतें स्‍वावलम्‍बी होंगी, तो प्रदेश और देश भी आत्मनिर्भर होगा. इसके बाद ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में कोई भी गांव और नौजवान, महिला अपने को बेरोजगार नहीं मान सकते. आप आर्थिक स्वावलंबन का एक नया आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं. राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को भी साकार कर सकते हैं. यह उसकी शुरूआत का अच्छा प्रयास है.

आजाद भारत के अंदर पहली बार पीएमजीएसवाई 2001 में लागू हो पाई- मुख्यमंत्री

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने उत्‍तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 204 करोड़ से 56 जिलों में 2095 किलोमीटर लंबे 748 मार्गों और पंचायती राज विभाग के माध्यम से 647 करोड़ की लागत से बनने वाली दो हजार किलोमीटर लंबी 1825 सड़कों का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री बनने का बाद शुरू किया. पहली बार आजाद भारत के अंदर पीएमजीएसवाई 2001 में लागू हो पाई.

आजादी के पांच दशक तक भारत की ग्रामीण व्यवस्था उन बुनियादी सुविधाओं से वंचित थी, जो अच्‍छी सड़कें विकास की प्रक्रिया के सबसे बड़े और सशक्त माध्यम होते हैं. उन्होंने कहा कि जिस ध्येय के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायत की व्यवस्था को लागू किया गया था, कहीं न कहीं ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत को पीएम ने विकास के लिए जितना पैसा इन संस्थाओं को दिया है. उस धनराशि का सही सदुपयोग अगर सभी पंचायतीराज की संस्थाएं करने लग जाएं, तो विकास और रोजगार की व्यापक संभावनाएं आगे बढ़ सकती हैं.

पंचायती व्यवस्थाएं केवल सरकार के पैसे पर ही निर्भर ना रहें- मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह नहीं है कि कितने गांव में आपने कुछ न कुछ दे दिया. कुछ कार्य ऐसा करिए कि जिसे आप वास्तव में यह कह सकें कि यह मेरे कार्यकाल का कार्य है. गांव के अंदर की कनेक्टिविटी ग्राम पंचायत को देनी चाहिए. ग्राम पंचायत अपने इस कार्य को करें, चाहे वह गांव के अंदर इंटर लॉकिंग, सीसी कार्य, वॉटर लॉगिंग की समस्या का समाधान का हो. गांव में कूड़ा प्रबंधन का हो तो कोई समस्या नहीं आने वाली है. लेकिन हमें यह सोच विकसित करनी होगी. हमारा गांव साफ सुथरा है, यह अपने आप में एक पहचान है. हमारा क्षेत्र पंचायत बेहतरीन तरीके से अपनी कार्यपद्धति को आगे बढ़ा रहा है, हमें इस दिशा में प्रयास करना चाहिए.

सीएम ने कहा कि पंचायती व्यवस्थाएं केवल सरकार के पैसे पर ही निर्भर ना रहें. अपनी आय कैसे बढ़ा सकते हैं ये विचार करें, तो पंचायतें हमारी स्वावलंबी बनेंगी. ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत क्षेत्रों के पास भी अपनी जमीन है और गांव के हॉट तो जिला पंचायतों द्वारा ही संचालित होते थे, इसको आय के साथ जोड़ने का कार्य हो सकता था. इसे मंडी समिति के साथ मिलकर आप ग्रामीण हाट के रूप में विकसित कर सकते हैं. पंचायतों को स्वावलंबी बनाना है तो इनकी आय को बढ़ाना पड़ेगा.

जिले में बन रहे उत्पादों को प्रमोट करें- मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि ओडीओपी किसी न किसी गांव से ही निकलता है. गोरखपुर का टेरा कोटा औरंगाबाद से निकला है. लखनऊ की चिकनकारी एक गांव से निकला है. अमरोहा का ढोलक, पीलीभीत की बांसुरी एक गांव से निकला है. संतकबीरनगर में बखिरा बर्तन का बहुत बड़ा केंद्र है. क्या यह हमारी पंचायतों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि हम अपने उत्पादों को प्रमोट करें. हमारे पर्व त्योहार आते हैं, तो हमें प्रयास नहीं करना चाहिए कि हमारे जिले में जो चीज बन रही है, उसे गिफ्ट में दें.

महत्व इस बात का नहीं कि उपहार कितना महंगा और बड़ा है. इस बात का महत्व है कि हमारे कारीगरों के मेहनत और हुनर कितना है. हम उसे कितना आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. पंचायती राज व्यवस्था को इससे जुड़ना पड़ेगा. यह विकास के नए आयाम प्रस्तुत करेगा.

इन सड़कों का हुआ शिलान्यास

– गगहा क्षेत्र में ग्राम बेला का यादव टोला संपर्क मार्ग

– बड़हलगंज के कंसापुर में मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य

– बड़हलगंज में कोल्हुआ से बेलसड़ी मार्ग का नवीनीकरण एवं मरम्मत कार्य

– उरुवा क्षेत्र के ग्राम सभा नरायनपुर में कविलासपुर से रग्घूपुर तक नवीनीकरण कार्य

– पाली के ग्राम पुंडा में नवीनीकरण एवं लेपन कार्य

– पिपरौली क्षेत्र में ग्राम बोगा से कुडा बुजुर्ग होते हुए कुड़नी मंदिर तक लेपन एवं नवीनीकरण कार्य

– ब्रह्मपुर में बरही लैला मोड़ से बरही गांव तक नवीनीकरण कार्य

– ब्रह्मपुर में हरैया मार्ग से पिपरामन्नी चौराहे से महुअई मोड़ तक लेपन

– ब्रहमपुर में बरही-झंगहा मार्ग से करही तक लेपन

– सहजनवां के चौतरवा में लेपन कार्य

– सरदारनगर के ग्राम सुरसादेउर बाबा टोला में लेपन कार्य

– भटहट में गुलरिहा बाजार से बूढ़ाडीह तक मरम्मत कार्य

– कैंपियरगंज में घघवा-मरहठा मार्ग में मरम्मत कार्य

– कैंपियरगंज में ग्राम मथौली में संपर्क मार्ग का लेपन कार्य

– कैंपियरगंज में गौरा बखरिया बडुआ संपर्क मार्ग का लेपन कार्य

– कैंपियरगंज में घघवा मरहठा पीएमजीएसआइ मार्ग के बिचउपुर चौराहा से बाराघाट तक लेपन कार्य

– पिपराइच में ग्रामसभा पिपरही से नैयापार पिच रोड तक मरम्मत कार्य

– पिपराइच में यदवापुर से महुअवा संपर्क मार्ग पर लेपन कार्य

– पिपराइच में बसडीला मोड़ से बरसैनी तक लेपन कार्य

– खजनी में ग्राम सैरो गोदाम से बनभरिया टोला तक लेपन कार्य

– खजनी में ग्राम खटैचा बिंदन से तितिल यादव के घर से होते हुए कठैचा टोला होते हुए हरीशचंद्र के घर तक लेपन कार्य

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