रिलायंस-फ्यूचर डील में हो सकती है देरी, दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

नई दिल्ली: मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज और किशोर बियानी के फ्यूचर रिटेल से जुड़े 24 हजार करोड़ रुपये की डील को फिलहाल थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है. दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने किशोर बियानी की अगुवाई वाले फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कारोबारी जेफ बेजोस के नेतृत्व वाली कंपनी अमेजन को सिंगापुर की अदालत के फैसले के बारे में सेबी, सीसीआई को लिखने से मना करने की अपील की गई थी. हालांकि अब अमेजन अधिकारियों को सिंगापुर की अदालत का फैसला बता सकेगी.

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने फ्यूचर रिटेल की याचिका को खारिज कर दिया. इस याचिका में दावा किया गया था कि अमेजन 24713 करोड़ रुपये के रिलायंस-फ्यूचर डील पर आपातकालीन न्यायाधिकरण के फैसले के बारे में अधिकारियों को लिख रही है. सिंगापुर अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण केंद्र (एसआईएसी) ने 25 अक्टूबर के अपने आदेश में अमेजन के पक्ष में फैसला दिया था. इस दौरान फ्यूचर रिटेल पर कंपनी की परिसंपत्तियों के किसी भी तरह के हस्तांतरण, परिसमापन या किसी करार के तहत दूसरे पक्ष से फंड हासिल करने के लिए प्रतिभूतियां जारी करने पर रोक लगाई गई थी.

क्या है मामला?

बता दें कि ये मामला पिछले साल अगस्त में फ्यूचर ग्रुप की कंपनी फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 फीसदी हिस्सेदारी का अमेजन के जरिए अधिग्रहण करने और इस के साथ ग्रुप की प्रमुख कंपनी फ्यूचर रिटेल में पहले हिस्सेदारी खरीदने के अधिकार से जुड़ा है. फ्यूचर रिटेल में फ्यूचर कूपन्स की भी हिस्सेदारी है. वहीं इस मामले में विवाद तब पैदा हुआ, जब फ्यूचर ग्रुप ने करीब 24,000 करोड़ रुपये में अपने खुदरा, भंडारण और लॉजिस्टिक कारोबार रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने का करार किया था. इसके बाद रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई डील को लेकर अमेजन ने सिंगापुर कोर्ट में केस दाखिल किया था.

वहीं दूसरी ओर से इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने पिछले महीने ही रिलायंस-फ्यूचर डील को मंजूरी दे दी थी. हालांकि इस डील के लिए अभी भी सेबी और अन्य वैधानिक निकायों से मंजूरी हासिल करने की जरूरत है.

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