IAS Success Story: साइंटिस्ट से UPSC टॉपर बनने में सुशील को लगे पांच साल पर नहीं मानी हार, क्या था उनके धैर्य का राज़? जानें

Success Story Of IAS Topper Sushil Kumar: ऐसा माना जाता है कि यूपीएससी एग्जाम अक्सर आपके धैर्य की परीक्षा लेता है. कुछ इन सालों में बिखर जाते हैं तो कुछ निखर जाते हैं. कई कैंडिडेट्स इस क्षेत्र में आने के पहले ही तैयार होते हैं कि सफलता मिलने में सालों लग सकते हैं पर इस धैर्य को बनाए रखना आसान नहीं होता. जाहिर सी बात है कि ऐसे में कई बार मन में यह ख्याल भी आता है कि कहीं गलत फील्ड में तो नहीं आ गए.

इन्हीं सब सवालों से जूझते और बार-बार असफलता का सामना करते सुशील कुमार को भी सफलता पाने में लंबा समय लग गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. साल दर साल परीक्षा देते रहे और यह जानने की कोशिश करते रहे कि कहां कमी रह गई है जिसे दूर करना है. अंततः उनकी सालों की तपस्या साल 2018 में पूरी हुई जब 106 रैंक के साथ उनका सेलेक्शन पक्का हुआ और वे आईपीएस पद के लिए चुने गए. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सुशील ने अपनी यूपीएससी जर्नी की खास बातें शेयर की. जानते हैं विस्तार से.

साइंटिस्ट हैं सुशील कुमार

यूपीएसससी परीक्षा देने का मन बनाने से पहले सुशील इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च, नई दिल्ली में साइंटिस्ट के पद पर काम कर रहे थे. यहीं रहते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और एक दो नहीं पूरे पांच अटेम्पट दिए. बार-बार किसी न किसी स्टेज पर आकर उनका चयन नहीं होता था पर सुशील भी कहां पीछे हटने वाले थे.

देखें सुशील कुमार द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक दिया गया इंटरव्यू

साल 2014 में उन्होंने अपना पहला अटेम्पट दिया था. 2014 और 2015 में वे प्री भी पास नहीं कर पाए थे पर उसके बाद से हर साल उन्होंने अच्छे मार्जिन से कंफर्टेबली प्री परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने तीन बार मेन्स एग्जाम भी क्लियर किया. हालांकि हर बार वे कुछ अंकों से रह जा रहे थे. वे कहते हैं कि प्री परीक्षा काफी कठिन स्टेज है जहां आठ से नौ लाख कैंडिडेट्स आवेदन करते हैं और सेलेक्ट केवल दस हजार होते हैं.

प्री के लिए टेस्ट सीरीज है जरूरी

सबसे पहले तो सुशील यही कहते हैं कि बहुत सी किताबें इकट्ठी न करें और सीमित सोर्स ही परीक्षा की तैयारी के लिए रखें. खासकर करेंट अफेयर्स के लिए बहुत ज्यादा सोर्सेस के चक्कर में न पड़ें. इसके बाद जब तैयारी पक्की हो जाए या आपको लगे कि अब आप काफी पढ़ चुके हैं, उस स्टेज पर टेस्ट पेपर सॉल्व करना शुरू करें. ये आपको प्री परीक्षा पास करने में बहुत हेल्प करेंगे. सुशील कहते हैं कि टेस्ट देने से आपकी कमजोरी हाईलाइट होती है जिसे आप समय रहते दूर कर पाएंगे. एनसीईआरटी और स्टैंडर्ड बुक्स से पढ़ने के अलावा सुशील नोट्स बनाने की भी सलाह देते हैं. वे कहते हैं कि इनसे एंड में रिवीजन करना आसान होता है. कम से कम परीक्षा के दो से तीन महीने पहले टेस्ट लगाना शुरू कर दें और मिनिमम 25 से 30 पेपर दें. खूब रिवीजन करें बस यही हेल्प काम आता है.

न्यूज पेपर को दें समुचित समय

सुशील मानते हैं कि इस परीक्षा में करेंट अफेयर्स का बहुत से पेपर्स में महत्वपूर्ण रोल होता है. इसलिए इन पर लगातार निगाह रखें और न्यूज पेपर रोज पढ़ें. इसके अलावा जीएस के विभिन्न पेपरों के लिए सुशील की सलाह है कि भले कोचिंग ज्वॉइन न करें लेकिन कुछ अच्छी कोचिंग्स के नोट्स ले लें और उनसे तैयारी करें.

जहां तक बात एथिक्स के पेपर की है तो इसमें आमौतर पर लोगों को शिकायत रहती है कि अच्छे नंबर नहीं आते. इसके लिए एक तो रियल लाइफ एग्जाम्पल डालें और दूसरा कोट्स आदि भी तैयार करके रखें जिनका जरूरत पड़ने पर प्रयोग करें. इसी तरह ऐस्से के पेपर के लिए पिछले आठ से दस साल के पेपर उठाकर देखें कि किन विषयों से प्रश्न आते हैं और उन टॉपिक्स को तैयार करें.

सुशील का अनुभव

सुशील अंत में यही कहते हैं कि इंटरव्यू को कभी भी लाइकली न लें और मेन्स पेपर देने के कुछ समय बाद से ही इसकी तैयारी शुरू कर दें. रोज पेपर पढ़ते रहें, देखें आपके आसपास क्या चल रहा है, जिससे प्रश्न बन सकते हैं और उन पर आपका क्या रिएक्शन है. जो रिएक्शन है वह बैलेंस्ड है या नहीं. इसके साथ ही इंटरव्यू दें यानी मॉक इंटरव्यू दें ताकि अपनी कमियों का पता कर सकें. सुशील ने खुद फाइनल एग्जाम से पहले आठ से दस मॉक दिए थे. वे कहते हैं कि आपके पास समय हो तो इससे भी ज्यादा मॉक दे सकते हैं. कुल मिलाकर इस परीक्षा की तैयारी को भी पिछली परीक्षाओं की तरह गंभीरता से लें तो चयन जरूर होगा.

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