कोरोना की तीसरी लहर होगी कितनी खतरनाक और कैसे करें अपना बचाव? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश में कोहराम मचा रखा है. कोरोना की पहली लहर से करीब चार गुणा अधिक तेज रफ्तार के साथ दूसरी लहर लोगों को अपनी चपेट में ले रही है. ऐसे में देश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमराती हुई दिख रही हैं. आज हालत ये हो गई है कि कोरोना के रोजाना बढ़ते मरीजों के चलते अस्पतालों में ऑक्सीजन से लेकर दवाईंयों तक की भारी कमी हो गई है. अस्पतालों में नए मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है. इस बीच कोरोना की एक और लहर की चेतावनी ने लोगों को चौंका कर रख दिया है.

कोरोना की तीसरी लहर आना तय

केन्द्र सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार ने बुधवार को यह चेतावनी दी है कोरोना की एक और लहर का आना तय है. केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने कहा कि वायरस के उच्च स्तर के प्रसार को देखते हुए तीसरी लहर आना अनिवार्य है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह तीसरी लहर कब आएगी और किस स्तर की होगी. जाहिर है कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह से लोगों को झकझोर कर रख दिया है, ऐसे में अगर सतर्कता नहीं बरती तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि तीसरी लहर के दौरान क्या हश्र होगा.

कितनी जानलेवा होगी तीसरी लहर?

कोरोना की तीसरी लहर के बारे में एबीपी न्यूज के साथ बात करते हुए गंगाराम के डॉक्टर अजीत सिन्हा ने कहा कि उस वक्त तक कोरोना खुद को म्यूटेट कर सकता हैं. ऐसे में उसका क्या असर होगा इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि दूसरे चरण के दौरान कितनी समस्या आईं ये बात किसी से छिपी नहीं है. दूसरे चरण में बेड, ट्रांसपोर्टेशन समेत कई समस्याएं आई हैं. ऑक्सीजन की कमी का संकट आया है. कई विफलताएं सामने आई हैं.

अजीत सिन्हा आगे कहते हैं कि अगर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत नहीं रखेंगे तो स्थिति खराब हो सकती है. उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर इतनी खतरनाक नहीं होती अगर लोग लापरवाही नहीं बरतते. लोग बिना मास्क चलने लगे थे. बेखौफ हो गए थे. अगर यही मानसिकता रही तो निश्चित तौर पर तीसरी लहर भी खतरनाक हो सकती है.

तीसरी लहर से कैसे होगा बचाव?

डॉक्टर अजीत सिन्हा ने कहा कि कोरोना के वक्त आपको एक ही चीज बचा सकती है, वो है आमलोगों में कोरोना के प्रति जागरूकता. लोगों को मास्क पहनना चाहिए और लगातार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए. कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए. इसके साथ ही, सरकार भी समझ गई है दूसरे चरण के दौरान, ऐसे में अब सरकार इसे गंभीरता से लेकर महामारी के खिलाफ तैयार रहती है, और ना सिर्फ मेडिकल बल्कि पैरामेडिकल सपोर्ट सिस्टम बनाती है, तभी इन चुनौतियों से पार पाया जा सकता है.

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