तलोजा जेल में बंद 22 साल के कैदी की कोरोना से मौत के बाद परिजन परेशान, जेल प्रशासन पर लगाया आरोप

<p style="text-align: justify;"><strong>मुंबई</strong>: नवी मुंबई के तलोजा जेल में बंद एक 22 वर्षीय कैदी की मौत अस्पताल में कोरोना से हो गई. मृतक के &nbsp;परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों की लापरवाही से उसकी मौत हुई.</p>
<p style="text-align: justify;">परिजनों के आरोपों के घेरे में आए तलोजा जेल के अधीक्षक कौस्तुभ कुरलेकर ने कहा, ‘विशाल आनंद दासारी नाम के कैदी ने मुंबई के सेंट जॉर्ज अस्पताल में बुधवार सुबह दम तोड़ दिया. कैदी को कोरोना संक्रमण की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद सेंट जॉर्ज अस्पताल में शिफ्ट किया गया था. शिफ्ट किए जाने से पहले 30 अप्रैल को मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कैदी पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत एक मामले में 2018 से जेल में बंद था.’&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैदी के परिजनों का क्या कहना है</strong><br />दासारी के रिश्तेदार अनीश भारती ने कहा, "जब भी उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें जेल में बुलाया था, तब तक उन्हें गले में दर्द और बेचैनी की शिकायत थी. हालांकि, जेल अधिकारियों ने उसकी हालत की उपेक्षा की. हमें जेल सुपरिटेंडेंट कौस्तुभ कुरलेकर से मिलने नहीं दिया गया. इस बीच, एक और तलोजा जेल के कैदी ने कोविड की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया है."</p>
<p style="text-align: justify;">जेल में सजा काट रहे कैदियों के परिजन भी चिंतित हैं. परिजनों को कैदियों द्वारा सूचना मिल रही है कि जेल में अमानवीय व्यवहार किया जाता है और तबीयत खराब होने पर कोई इलाज उपलब्ध नहीं कराया जाता है. जब तक तबीयत बुरी तरह न खराब हो जाए तब तक डॉक्टरों को सूचना नहीं दी जाती. जेल के अधीक्षक कौस्तुभ कुरलेकर हो या जेल के अन्य अधिकारी कोई भी कैदियों के बीमार होने पर सुनवाई नहीं करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तलोजा जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप</strong><br />यह कोई पहला मामला नहीं है जब तलोजा जेल में लापरवाही और जेल अधिकारियों पर अमानवीय होने के आरोप लगे हैं. इससे पहले, एल्गर परिषद-माओवादी लिंक मामले के एक आरोपी कवि-कार्यकर्ता वरवारा राव ने तलोजा जेल में स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ शिकायत की थी, जहां उन्हें जेल भेजा गया था. राव ने एक अदालत को सौंपे गए एक हलफनामे में कहा था कि कैदियों द्वारा सामना किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का समाधान करने के लिए केवल तीन आयुर्वेदिक चिकित्सक थे और तालुका जेल अस्पताल में कैदियों को उपस्थित होने के लिए कोई स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट या चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे पहले महाराष्ट्र के जेल अधिकारियों को कोविड की दूसरी लहर में कैदियों और जेल कर्मचारियों की मौत के बारे में सूचित किए जाने के बाद जेल के अस्पतालों में योग्य चिकित्सा कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपलब्धता का विवरण देने के लिए कहा था.</p>
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