बिहार में खरीद प्रक्रिया सरल किए जाने पर धान की खरीदी में तेजी, इतना है लक्ष्य

पटना: बिहार में बिना जमीन की रसीद के धान बेचने और प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) की संख्या बढ़ाए जाने के बाद किसानों को धान बेचने में सहूलियत आ रही है, जिस कारण धान खरीद में भी तेजी आई है. सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि किसानों को धान बेचने में एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र) की जरूरत नहीं होने और रसीद की भी अनिवार्यता समाप्त कर दिए जाने के बाद गैररैयत किसान भी अब अपने धान बेचने के लिए धान क्रय केंद्र पहुंच रहे हैं. इधर, विभाग द्वारा पैक्स और व्यापार मंडल की संख्या में लगातार वृद्धि की जा रही है.

2 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है- सुशील मोदी

सहकारिता विभाग ने तीन दिनों में राज्यभर में 274 खरीद केंद्र बढ़ा दिए. इस दौरान 40 हजार से अधिक मीट्रिक टन धान की खरीद हुई. 20 दिसंबर तक राज्यभर में खरीद करने वाली सहकारी समितियों की संख्या 6100 हो गई और अब तक 30 हजार से अधिक किसान धान बेच चुके हैं.

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में 45 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य है और 2 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है. राज्य सरकार ने धान खरीद को सुगम बनाने के लिए जमीन के कागज (एलपीएस) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है और केंद्र सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में 53 रुपये की वृद्धि कर इसे 1868 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इधर, विभाग के एक अधिकारी कहते हैं कि राज्य में रविवार तक 2,37,882 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है.

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