रुद्रप्रयाग के कोठगी गांव में खनन का विरोध, ग्रामीण बोले- पैतृक घाट, पानी के स्रोत को हो सकता है नुकसान

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग तहसील अंतर्गत कोठगी गांव की सीमा में खनन का स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध किया है. स्थानीय ग्रामीणों ने खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की है. ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस की टीम को बैरंग लौटाया. दरअसल, कोठगी गांव के पास अलकनंदा नदी के तट पर खनन के लिए पट्टा स्वीकृत किया गया है. जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर खनन का कार्य किया जाना है, वहां ग्रामीणों का पैतृक घाट, पानी का स्रोत, गौचर की जमीन है. 

कई गांवों के लोग कर रहे हैं विरोध 
कोठगी के साथ ही भटवाड़ी, मदोला, क्वीली-कुरझण सहित अन्य गांवों के ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि खनन से पेयजल स्रोत सूख जाएंगे. पशुओं को चराने में परेशानी होगी. उन्होंने कहा कि बिना ग्रामीणों को विश्वास में लिए जबरदस्ती खनन करने का प्रयास किया जा रहा है. ग्राम पंचायत ने खनन के लिए किसी तरह का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया है.

ग्रामीण आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार 
ग्रामीण रेता-बजरी और पत्थर के खनन का विरोध कर रहे हैं. कुछ दिन पूर्व ही प्रशासन और पुलिस बल को ग्रामीणों ने वापस भेज दिया था. खनन के विरोध में ग्रामीण आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. वहीं, उत्तराखंड क्रांति दल के युवा नेता मोहित डिमरी ने खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों का समर्थन किया है. 

पट्टा निरस्त करने की मांग
मोहित डिमरी ने कहा कि प्रशासन पुलिस का भय ग्रामीणों को ना दिखाए. जोर-जबरदस्ती कर खनन करवाया गया तो इसका अंजाम सही नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने पेयजल स्रोत, पैतृक घाट और गौचर की जमीन को लेकर चिंतित हैं और उनकी चिंता जायज भी है. युवा नेता मोहित ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ग्रामीणों के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है. उन्होंने प्रशासन से जनहित में इस स्थान से जल्द से जल्द पट्टा निरस्त करने की मांग की है.

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