भारत में वायु प्रदूषण न सिर्फ जानें ली, बल्कि जीडीपी का भी भारी नुकसान किया- रिसर्च

Air pollution: दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड के बीच प्रदूषण का फिर खतरा बन गया है. हवा की गुणवत्ता का स्तर गंभीर कैटेगरी में पहुंचने से लोगों को 26 दिसंबर तक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. इस बीच, भारत को होनेवाले वायु प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य और आर्थिक मोर्चे पर जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा है. ताजा रिसर्च में बताया गया है कि 2019 में वायु प्रदूषण के चलते होनेवाली बीमारियों से भारत में 16 लाख 70 हजार लोगों को जान गंवानी पड़ी. देश में कुल मौत के आंकड़ों में इसकी 17. 8 फीसद हिस्सेदारी रही. वायु प्रदूषण की वजह से मौत और बीमारियों ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 1. 4 फीसद का नुकसान पहुंचाया. चौंकानेवाला खुलासा मेडिकल जर्नल लांसेट में प्रकाशित रिपोर्ट से सामने आया है.

वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव का खुलासा

वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को जीडीपी में 2 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ. रिपोर्ट में बताया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण राज्य के जीडीपी में होनेवाले आर्थिक नुकसान का प्रतिशत भारत के उत्तरी और मध्य राज्यों में ज्यादा रहा. सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर प्रदेश को जीडीपी का 2.2 प्रतिशत और बिहार को जीडीपी का 2 प्रतिशत सहना पड़ा. घरेलू प्रदूषण के चलते मौत की दर में 1990-2019 के बीच 64.2 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि बाहरी प्रदूषण के कारण मौत की दर उसी अवधि में 115 फीसद तक बढ़ी.

भारत को जीडीपी में 2 लाख 60 हजार करोड़ का नुकसान

हर राज्य में कुल मौतों के विश्लेषण से पता चला कि वायु प्रदूषण की वजह से मृत्यु दर सबसे ज्यादा राजस्थान में 21. 2 फीसद, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 20.8 फीसद, उत्तर प्रदेश में 19. 5 फीसद, हरियाणा में 19 फीसद, बिहार में 18. 8 फीसद, गुजरात में 18.9 फीसद, उत्तराखंड में 18. 6 फीसद और दिल्ली में 18. 2 फीसद रही. रिसर्च के लिए अपनाए गए बेहतर तरीकों के इस्तेमाल से पुराने आंकलन की तुलना में स्वास्थ्य और बीमारी पर वायु प्रदूषण के दुष्परिणाम ज्यादा स्पष्ट नजर आते हैं. रिपोर्ट में इसका भी खुलासा किया गया है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर जीडीपी का 0.4 प्रतिशत अनुमानित खर्च के अलावा, वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव सबसे ज्यादा भारत के कम विकसित राज्यों में रहा.

विशेषज्ञों ने नतीजों पर चिंता जताते हुए कहा कि है कि अगर वायु प्रदूषण को दूर कर दिया जाता, तो 18 फीसद लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकता था. आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल प्रोफेसर बलराम भार्गव ने टिप्पणी की, “नतीजे जाहिर कर रहे हैं कि वायु प्रदूषण के कारण बीमारी के बोझ का 40 फीसद फेफड़ों की बीमारियों से है, बाकी 60 फीसद इस्कैमिक हार्ट का रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज और समय से पहले बच्‍चे के जन्‍म से जुड़ी नवजात मौत है. इससे पता चलता है कि वायु प्रदूषण का इंसानी स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ा है.”

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